इसलिए महिलाएं भोगती हैं मासिक धर्म की पीड़ा, जानिए इसके पीछे की पक्की कहानी

Jul 21, 2017
इसलिए महिलाएं भोगती हैं मासिक धर्म की पीड़ा, जानिए इसके पीछे की पक्की कहानी

सभी महिलाएं अक्सर सोचती हैं कि, आखिर क्यों उन्हें ही मासिक धर्म की पीड़ा को झेलना पड़ता है। ये सवाल लगभग सभी लड़कियों के मन में आता है, वैसे तो मासिक धर्म को लेकर कई वैज्ञानिक कारण भी है। लेकिन हिंदू धर्म में मासिक धर्म को धार्मिक कारण भी बताया जाता है। जानिए आज हम आपको बताते हैं इसके पीछे जिस कथा का जिक्र है, उसमे मासिक धर्म को लेकर क्या बताया गया है।

चलिए जानते है
बताया जाता है कि, किसी समय में इंद्र देव ‘गुरु बृहस्पति’ से बहुत नाराज चल रहे थे। जब इस बात का पता असुरों को लगा, तो उन्‍होंने देवलोग पर हमला कर दिया, जिसके कारण देवराज इंद्र को अपनी गद्दी छोड़कर वहां से भागना पड़ा था। और फिर अपने आपको बचने के लिए वह ब्रह्मा जी की शरण में पहुंच गए थे, और उनसे इस समस्या से निकलने का रास्ता पूछा।

ये भी पढ़ें :-  आजादी के बाद देर रात संसद भवन को गंगाजल से धोया गया था, ये थी वजह

इंद्र की समस्या सुनकर ब्रह्मा जी उन्हें बताया कि, उन्‍हें एक ब्रह्म ज्ञानी की सेवा करनी चाहिए और अगर वो प्रसन्‍न हो गए तो आपको आपकी सत्‍ता वापस मिल जाएगी। ब्रह्मा जी के बताए हुए तरीके पर भगवान इंद्र ब्रह्म ज्ञानी की सेवा करने लगे, लेकिन उन्‍हें इस बात का बिलकुल नहीं पता था कि, ज्ञानी जी की माता असुर है और वह मन में असुरो के प्रति सहानूभूति रखती हैं। लेकिन जब इस बात का पता इंद्र देव को लगा कि, ज्ञानी जी उनके द्वारा दी गए हवन सामग्री देवताओं की जगह असुरों को अर्पित कर देते हैं, तो उन्होंने क्रोधित होकर गुरु की हत्या कर दी। जिसके बाद इंद्र पर ब्रह्म हत्या का पाप लग गया। फिर इससे बचने के लिए उन्होंने भगवान विष्णु की तपस्या करनी शुरू करदी, जिसके बाद विष्णु उनसे प्रसन्‍न हो गए।

ये भी पढ़ें :-  अरे भ्रष्ट नेताओं देश को भी है ऑक्सीजन की जरूरत..

इंद्र के दवारा की गई अपनी तपस्या से खुश हो कर भगवान विष्णु ने इंद्र को इस पाप से छुटकारा दिलाने के लिए उन्हें एक उपाए बताया उन्‍होंने इंद्र से कहा कि, आप अपने इस पाप को चार लोगों में बांट सकते है लेकिन इसके साथ ही तुम्‍हें उन्‍हें वरदान भी देने होंगे, जिन चार लोगों में तुम इस पाप को बांट सकते है वह है पेड़, भूमि, जल और स्‍त्री। फिर इंद्र ने ऐसा ही किया उन्होंने अपने पाप को बांट दिया और साथ में वरदान भी दे दिया। तभी कहा जाता है कि इस प्रकार स्‍त्री के हिस्‍से में यह पाप मासिक धर्म के रूप में आया और साथ ही उन्‍हें वरदान मिला कि वह पुरुषों की तुलना में सहवास का ज्‍यादा आनंद ले पाएंगी।

ये भी पढ़ें :-  भारत: जेलों में कैदियों की संख्या क्षमता से अधिक..
लाइक करें:-
 

संबंधित ख़बरें

वायरल वीडियो

और पढ़ें >>

मनोरंजन

और पढ़ें >>
और पढ़ें >>