भाई-बहन की परवरिश की जिम्मेदारी 11 साल की मासूम के कन्धों पर

Aug 24, 2016
भाई-बहन की परवरिश की जिम्मेदारी 11 साल की मासूम के कन्धों पर
बहराइच। जिस उम्र में बच्चे खिलौने से खेलते हैं, पढ़ाई करते हैं, उस उम्र में इस मासूम के कंधों पर अपने तीन साल के भाई व चार माह की मासूम बहन की देखभाल व उनकी परवरिश की जिम्मेदारी आन पड़ी है। इसे खुद नहीं समझ में आ रहा है कि वह क्या करे, क्या न करे। लोग भी नियति की क्रूरता से स्तब्ध हैं।
लाइव टुडे के अनुसार  जिले के प्यागपुर थाना क्षेत्र अंतर्गत इमलियागंज निवासी रामकरन कुछ दिन पूर्व एक हत्या के मामले में जेल चले गए, जिसके बाद घर व बच्चे की जिम्मेदारी पत्नी गुड्डी के कंधे पर आ गई। गुड्डी भी किसी तरह मांग कर अपनी 11 वर्षीय पुत्री शीला, तीन वर्षीय पुत्र धरमपाल व चार माह की मासूम काजल का पालन पोषण करती थी।
गुड्डी अपने बेटे धरमपाल को लेकर अपने पति से मिलने जेल आई हुई थी। जहां पर दोपहर बाद मुलाकात करके अपने घर के लिए रवाना हुई थी। खुटेहना के पास सवारी गाड़ी से उतरकर अपने घर के लिए जैसे ही मुड़ी थी कि बहराइच की ओर से जा रही एक तेज रफ्तार बाइक ने ठोकर मार दी, जिससे गुड्डी व दोनों बेटे घायल हो गए।
इलाज के लिए जिला अस्पताल बहराइच लाया गया, जहां पर मां गुड्डी ने भी इन मासूम बच्चों का साथ छोड़ दिया। चार साल की मासूम बच्ची को शायद पता भी चला कि अब उसकी मां उसे इस दुनिया से छोड़कर चली गई है। बच्ची बार-बार अपनी बड़ी बहन शीला से मां के पास जाने का इशारा कर रही है। मां का दूध पीने के लिए वह रो रो रही है।

 

लाचार बहन उसे अब समझा भी नहीं सकती कि अब दूध पिलाने वाली मां इस दुनिया में नहीं रही। शीला के पास अब न रहने को घर है और न कमाने वाला कोई बचा है। उसके कंधे पर एक भाई व एक बहन का बोझ लद गया है। ग्यारह साल की बच्ची के कंधों पर पहाड़ टूट पड़ा है।
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