शरीयत मुस्लिम मर्दों और औरतो के लिए ऑक्सीजन की तरह: अस्मा ज़हरा

Nov 08, 2016
शरीयत मुस्लिम मर्दों और औरतो के लिए ऑक्सीजन की तरह: अस्मा ज़हरा

एक जनसभा का आयोजन किया गया था। जिसमे मुख्य रूप से शरीयत की बात हुयी इस जनसभा में ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के सदस्य और हैदराबाद के सांसद असदुद्दीन ओवैसी भी शामिल हुए थे। जनसभा में महिलाओं के बैठने के लिए अलग से इंतजामात थे। एआईएमपीएलबी ने महिला सदस्यों से भी हुयी। अपनी जगह से ही अस्मा ज़हरा ने कहा कि शरीयत मुस्लिम मर्दों और महिलाओं के लिए ऑक्सीजन की तरह है और इसमें किसी भी सूरतेहाल में में बदलाव के लिए हम राजी नहीं होंगे। उन्होंने कहा कि ये अल्लाह का क़ानून है और पूरी तरह से इंसानो को देखते हुए बनाया गया है |

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उन्होंने कहा की यह पूरी तरह से दुरुस्त है। इसमें महिलाओं को सम्मान और ऊँचे ओहदे का दर्जा दिया गया है। हम इससे पूरी तरह सेफ और सहमत हैं। उन्होंने कहा, चन्द लोग मुस्लिम महिलाओं और मीडिया के एक तबके द्वारा शरियत को बदनाम करने की कोशिश कि उसकी निंदा की। मुस्लिम पर्सनल बोर्ड की एक और सदस्य, साबिहा सिद्दीकी ने कहा कि सरकार समाज में टकराव पैदा करने में अपना टाइम और मशीनरी बर्बाद कर रही है।
मुस्लिम पर्सनल लॉ के साथ हस्तक्षेप करने के विरोध के लिए विभिन्न संगठनो ने एक साथ मिलकर महिलाओं और पुरुषों के लिए एक सिग्नेचर अभियान चलाया था | इस अभियान के तहत मुस्लिम पर्सनल बोर्ड द्वारा निर्धारित एक प्रोफॉर्मा पर पुरुषों और महिलाओं के सिग्नेचर कलेक्ट किये गये हैं।

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