शहीद सिपाही अब्दुल सुबूर को इंसाफ़ दिलाने के लिए, केजरीवाल के खिलाफ खुला पत्रकार वसीम अकरम त्यागी का खत

Oct 29, 2016
शहीद सिपाही अब्दुल सुबूर को इंसाफ़ दिलाने के लिए, केजरीवाल के खिलाफ खुला पत्रकार वसीम अकरम त्यागी का खत

जैसा की आपको पता है की हेड कांस्टेबल अब्दुल सुबूर 4 मार्च 2016 की रात को शहीद हो गए थे तब से अब तक उनका परिवार आपसे मुआवज़े के लिए कई बार मिलने की कोशिश कर चूका है परंतु आपके सहयोगियों द्वारा उन्हें आपसे मिलने नहीं दिया गया । लेकिन मुख्यमंत्री ने दिल्ली सरकार के नियम के मुताबिक, जिसमें तय किया गया है की दिल्ली पुलिस के ड्यूटी पर शहीद होने वाले हर जवान के परिवार को सरकार की तरफ से एक करोड़ का मुआवज़ा दिया जाएगा, जबकि सुबूर के परिवार को ना तो मुआवज़ा दिया गया और ना ही उसे शहीद का दर्जा दिया गया।

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सुबूर को शहीद ना मानने का कारण ये बताया गया की वो मौत के टाइम ड्यूटी पर नहीं थे जबकि दिल्ली पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों के द्वारा दिखाई गई FIR में ये साफ लिखा है की सुबूर मौत के वक़्त ड्यूटी पर थे।

इस अन्याय के खिलाफ वरिष्ठ पत्रकार वसीम अकरम त्यागी, अली सोहराब और नावेद चौधरी ने सोशल मीडीया पर एक मुहिम चलाई जिसके बाद आम आदमी पार्टी के दफ़्तर से प्रिया शर्मा ने उनसे बात की और मामले की जानकारी लेने के बाद कहा की सुबूर की मौत ड्यूटी पर नहीं हुई इसलिए उनके परिवार को मुआवज़ा नहीं दिया गया। जिसके बाद प्रिया शर्मा को दिल्ली पुलिस के अफसरों द्वारा दर्ज कराई गई FIR की कॉपी ईमेल कर दी गयी जिसमें ये लिखा है की सुबूर ड्यूटी करते हुए मारे गये लेकिन वहाँ से अब तक कोई जवाब नहीं आया।

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आज पत्रकार वसीम अकरम त्यागी ने इसी मामले को लेकर दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को एक खुला खत भी लिखा है, जिसे आप पढ़ सकते हैं।

 

आदरणीय अरविन्द केजरीवाल
मुख्यमंत्री, दिल्ली सरकार
महोदय,
जैसा की आपको पता है की हेड कांस्टेबल अब्दुल सुबूर 4 मार्च 2016 की रात को शहीद हो गए थे तब से अब तक उनका परिवार आपसे मुआवज़े के लिए कई बार मिलने की कोशिश कर चूका है परंतु आपके सहयोगियों द्वारा उन्हें आपसे मिलने नहीं दिया गया ।
दिल्ली पुलिस ने अपने 22 मई, 2016 के पत्र द्वारा अब्दुल सुबूर को ड्यूटी पर शहीद माना और उन्हें Rs. 1 करोड़ का मुआवज़ा दिए जाने की संस्तुति की ।
केजरीवाल जी हम आपसे मांग करते हैं की आप तुरंत अब्दुल सुबूर के परिवार को शहीदों को दिए जाने वाला मुआवज़ा देकर उनके परिवार से न्याय करें।
आपका
वसीम अकरम त्यागी
पत्रकार

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(वसीम अकरम त्यागी की कलम से )

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