संजीव चतुर्वेदी ने (कैट) में लगाई न्याय की गुहार

Apr 18, 2016

भ्रष्टाचार के खिलाफ बिगुल बजानेवाले मैगसेसे पुरस्कार से सम्मानित भारतीय वन सेवा के अधिकारी संजीव चतुर्वेदी ने दिल्ली सरकार में प्रतिनियुक्ति के मामले को पिछले एक साल से लटकाने एवं केंद्र सरकार द्वारा उन्हें प्रताड़ित किये जाने का आरोप लगाते हुए केंद्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण (कैट) का दरवा खटखटाया है और उस से न्याय की गुहार की है.

अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान में उप निदेशक के पद पर प्रतिनियुक्त श्री चतुर्वेदी ने गत दिनों दिये गये अपने हलफनामे में यह आरोप लगाया है और इसके लिए प्रधानमंत्री की अध्यक्षता वाली कैबिनेट की नियुक्ति  समिति को जिम्मेदार ठहराया है. कैट कल इस मामले की सुनवाई करेगा.

गौरतलब है कि अरविन्द केजरीवाल ने दिल्ली का मुख्यमंत्री बनते ही श्री चतुर्वेदी को अपना ओएसडी बनाने के लिए केंद्र से उन्हें स्थानांतरित करने की मांग की थी लेकिन एक साल के बाद उन्हें स्थानांतरित नहीं किया गया.

श्री चतुर्वेदी ने हलफनामे में आरोप लगाया है कि तमिलनाडु कैडर और गुजरात कैडर के अधिकारियों के मामले में नियमों को ताक पर रखकर उन्हें प्रतिनियुक्त किया गया लेकिन उनके मामले में कैबिनेट की नियुक्ति समिति  ने पूर्वाग्रह के कारण आज तक कोई फैसला नहीं लिया.

उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि श्री मोदी के  प्रधानमंत्री बनने  के बाद कैबिनेट की नियुक्ति समिति ने 39 आदेश पारित किये जिसमे 19 ऐसे मामले थे जो नियमों के दायरे में नहीं थे और उनमे से 14 मामलों को समिति ने निपटाया भी लेकिन उनके मामले को पिछले एक साल से लटकाये रखा जबकि उनका मामला सभी नियमों का पालन करता है.

श्री चतुर्वेदी का कहना है कि एक तरफ तो मोदी सरकार भ्रष्टाचार को रोकने की बात करती है, दूसरी तरफ भ्रष्टाचार से लड़ने वालों को प्रताड़ित और परेशान भी करती है.

उन्होंने आरोप लगाया कि उत्तर प्रदेश के एक बड़े नेता के संबंधी होने के कारण एक अधिकारी  को और उत्तराखंड के मुख्यमंत्री के ओएसडी को तो नियमों को ताक पर रखकर  प्रतिनियुक्त कर दिया जाता  है जो बाद में एक स्टिंग ऑपरेशन में फंस गए लेकिन भ्रष्टाचार के खिलाफ जंग लड़ने वाले को  बार-बार अपमानित और परेशान  किया जाता है.

श्री चतुर्वेदी ने अपने हलफनामे में उन सभी घटनाओं का जिक्र किया है जिसमे उन्हें प्रताड़ित किया गया चाहे वो उनके कैडर बदलने या अपनी मैगसेसे सम्मान की पुरस्कार राशि को प्रधानमंत्री कोष में देने का मामला हो.

उन्होंने कैट से कहा कि उनका कैबिनेट कमेटी नियुक्ति से विश्वास उठ गया है इसलिए अदालत उन सभी 39 मामलों के कागजात मंगाए जिन पर समिति ने विचार किया था  और उन्हें  उनकी प्रतिनियुक्ति के मामले में न्याय दिलाये. अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान में श्री चतुर्वेदी की नियुक्ति जून में समाप्त हो रही है.

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