आरएसएस के नेता का दावा- RSS कार्यकर्ता बगैर पैसे के भाजपा का प्रचार करने को तैयार नहीं

Mar 07, 2017
आरएसएस के नेता का दावा- RSS कार्यकर्ता बगैर पैसे के भाजपा का प्रचार करने को तैयार नहीं

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में 8 मार्च को अंतिम चरण का पूर्वांचल की 40 सीटों पर मतदान होना है। जिसमे बीएसपी सुप्रीमो मायावती BSP को जितवाने में लगी है तो अखिलेश यादव और राहुल गांधी अपनी सपा-कांग्रेस गठबंधन को जिताने में लगे है। वही बीजेपी विधानसभा चुनाव में जीत दर्ज करने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी वाराणसी में डेरा डाले हुए हैं और यहां पर प्रचार की कमान खुद संभाले हुए हैं। लेकिन भाजपा के लिए बुरी खबर यह है कि RSS प्रचारक टिकट बटवारे से खुश नहीं है और वे लोकसभा चुनाव जितना उत्‍साह नहीं दिखा रहे हैं। जो की भाजपा के लिए चिंता की बात है।

जनसत्ता के अनुसार, टिकट बटवारे से नाराज चल रहे कुछ RSS नेताओं की जगह लेने के लिए लखनऊ से एक पूर्व प्रचारक को बनारस बुलाया गया है। हालांकि बनारस में भाजपा विरोधी मतों के एकजुट होने की खबरें सामने आने के बाद RSS की गतिविधियां बढ़ गई हैं। RSS काशी प्रांत के प्रचारक ने बताया कि हमें ऊपर से साफ निर्देश है कि हम केवल लोगों से वोट डालने को कहेंगे। हम उन्‍हें यह नहीं कहेंगे कि वोट किसे देने है। हमारे स्‍वयंसेवकों को साफ तौर पर कहा गया है कि मतदान के दिन ही हम लोगों से भाजपा को वोट देने को कहेंगे।

कृष्‍ण गोपाल ने अपनी मीटिंग में कार्यकर्ताओं से कहा कि व्‍यक्ति हमारे लिए महत्‍वपूर्ण नहीं है। केंद्र की सरकार उन मुद्दों पर काम कर रही है जिनके लिए हम अभी तक बोलते रहे हैं। उन्‍होंने अंतरराष्‍ट्रीय योग दिवस और गौरक्षा का उदाहरण भी दिया। कृष्‍ण गोपाल ने डिवीजन वाइज संयोजकों की बैठक की और साथ ही शहर के सभी हिस्‍सों में बूथ लेवल मीटिंग भी की हैं।
खबर ये भी है कि, वाराणसी और गोरखपुर क्षेत्र के कई प्रचारक प्रचार में बिलकुल भी अपना योगदान नहीं दे रहे हैं। जिसके चलते सह कार्यवाह कृष्‍ण गोपाल को कई दौरे करने पड़े हैं ताकि RSS कार्यकर्ताओं को भाजपा के पक्ष में प्रचार के लिए मनाया जा सके। बताया जाता है कि बच्‍चों और रिश्‍तेदारों को टिकट देने, 70 साल के उम्‍मीदवारों को खड़ा करने और पार्टी के लिए लंबे समय से कार्यरत रहे कार्यकर्ताओं के बजाय बाहर से आये लोगो को टिकट देने से RSS नेताओं में नाराजगी है। गोरखपुर के एक RSS नेता इसी बीच एक अलग तरह की समस्‍या बताते है। उन्‍होंने बताया कि आजकल सब कुछ राजनीतिक हो गया है। जब हम स्‍वयंसेवकों से भाजपा के लिए काम करने को कहते हैं तो वे इसकी भाजपाइयों से तुलना करते हैं। कर्इ स्‍वयंसेवक अब राजनीतिक काम के लिए पैसों की उम्‍मीद रखते हैं।

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