देश में भीख मांगने वालों के आंकड़ों में कमी, मुस्लिम बाकियों के मुकाबले अब भी ज्यादा

Jul 29, 2016

जनगणना रिपोर्ट ने देश में भीख मांगने वालों की जनसंख्या बताई है। इसके मुताबिक, भीख मांगने वाले सबसे ज्यादा लोग मुस्लिम धर्म के हैं। इस रिपोर्ट में हिंदू, ईसाई और बाकी धर्मों के बारे में भी बताया गया है। रिपोर्ट को 2011 में आई जनगणना के आधार पर तैयार किया गया है। रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि 72.89 करोड़ लोग ऐसे हैं जो कोई काम नहीं करते। हालांकि, ऐसा नहीं है कि देश में इतने लोग सच में ही खाली बैठे हैं। दरअसल, काम ना करने वाली केटेगरी में उन लोगों को रखा जाता है जो देश की अर्थव्यस्था में कोई योगदान नहीं देते। इसमें खेती करने वाले, घर का काम करने वाले लोग भी शामिल हैं। ऐसे भी लोग हैं जिन्हें सैलरी भी मिलती है।

क्या है भिखारियों के आंकड़ें: देश के लिए अच्छी बात यह है कि 2001 में हुई जनगणना की तुलना में भिखारियों की संख्या अब काफी कम हुई है। जहां 2001 में 6.3 लाख लोग भीख मांगते थे, वहीं अब आंकड़े 41 प्रतिशत गिरकर 3.7 लाख पर आ गए हैं। इन लोगों में 92,760 मुस्लिम लोग भीख मांगते हैं। इन आकंड़ों को बड़ा इसलिए माना गया है क्योंकि इनकी जनसंख्या देश की जनसंख्या की कुल 14 प्रतिशत ही है। वहीं हिंदू, जिनकी जनसंख्या 79.8 प्रतिशत है उनमें से 2.68 लाख लोग भीख मांगते हैं। वहीं ईसाई धर्म को मानने वाले 0.88 प्रतिशत लोग भीख मांग रहे हैं। वहीं बौद्ध धर्म में 0.52 प्रतिशत, सिख में 0.45 प्रतिशत और जैन धर्म में 0.06 प्रतिशत भीख मांगते हैं।
जुर्म है भीख मांगना: भारत में भीख मांगना जुर्म है। इसके लिए 3-10 साल की कैद है, लेकिन अभी तक यह साफ नहीं है कि किन लोगों को भीख मांगने वाले की कैटेगरी में रखना है। कई राज्यों में तो बेघर, मजदूर और दूसरी जगहों से आए हुए लोगों को भी इसी कैटेगरी में रखा जाता है। इसी पर लोगों में असहमति है।

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