RBI का खुलासा: मोदी सरकार से उठ गया अब लोगों का विश्वास, नौकरी के नाम पर मिला सिर्फ धोखा

Aug 12, 2017
RBI का खुलासा: मोदी सरकार से उठ गया अब लोगों का विश्वास, नौकरी के नाम पर मिला सिर्फ धोखा

भारत में ज्यादातर नौजवानों का सपना यही है कि, उनको पढ़ने-लिखने के बाद एक अच्छी सी नौकरी मिल जाये। इसकी सबसे बड़ी वजह यही है कि, खेती-बाड़ी के लिए जमीने हर आये दिन सिकुड़ती जा रही है, और अपना खुद का व्यापार करने के लिए बहुत सरे रुपियों की जरुरत पड़ती है। इसलिए लोग नौकरी करने में ज्यादा दिलचस्पी रखते है। लेकिन हमारे देश में नौकरी पाना इतना भी आसान नही है, जितना हम लोग सोच रहे हैं। ऐसे करोड़ों बेरोजगार लोग आज भी लम्बी लाइन लगाए हुए खड़े हैं। और इनमे सबसे हैरानी की बात तो ये है कि न निजी क्षेत्र और न ही सरकार इन बेरोजगारों को नौकरी दे पाने में सक्षम दिखाई रही है।

इसी वजह से 2014 के लोकसभा चुनावो में प्रधानमंत्री मोदी ने इसे बड़ा मुद्दा बनाया और भारत के लोगों से वादा किया कि, उनकी सरकार बनने के बाद हर साल 1 करोड़ बेरोजगारों को नौकरी दी जाएगी। लेकिन अब हाल ये है कि, मोदी सरकार बन भी गई है और उसके बने तीन साल भी हो चुके है। लेकिन दूर-दूर तक हाल वैसा ही नज़र आ रहा है। अब हर आये दिन लोगों का मोदी सरकार से भरोसा उठता ही जा रहा है। जिसका खुलासा रि‍जर्व बैंक ऑफ इंडि‍या का ये ताजा सर्वे भी बता रहा है।

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रि‍जर्व बैंक ऑफ इंडि‍या ने बेंगलुरु, चेन्‍नई, हैदराबाद, कोलकाता, मुंबई और नई दि‍ल्‍ली में इस सरकार के दावे का सर्वे किया कि, इन तीन सालों में सरकार ने अपने दावे पर कितनी खरी उतरी है। तो ये है उसका चौकाने वाला सर्वे कि लोगों की आय में किसी तरह की कोई बढ़ोतरी नहीं हुई है, और लोगों की सैलरी जितनी 2013 में थी, अब भी वहीँ है। लेकिन खर्चों में ज़रूर बढोतरी हुई है।

सर्वे के मुताबिक मार्च 2016 में 31.3 % लोगों का मानना था कि‍ उनकी इनकम बढ़ी है वहीं मार्च 2017 में 27.7 % लोगों की ये राय रही, वहीँ मार्च 2016 में 54.6 % लोगों का भरोसा था कि‍ उनकी इनकम बढ़ेगी, मगर जून 2017 तक 54.6 % से घटकर 48.6 % लोगों का ये भरोसा रह गया। कि उनकी इनकम बड़े गी।

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वहीँ दूसरी तरफ रोजगार के मामले में मार्च 2016 में 34.3 % लोगों को लगता था कि, हालात सुधरे हैं। लेकिन जून 2017 में सिर्फ 30.8 % लोगों ने इस पर सहमति जताई कि, हालात सुधरे हैं। जबकि ऐसे 21.2 % लोगों ने रोजगार के खतरे को लेकर स्थिति बिगड़ने का संदेह जताया है। इतना ही नहीं बल्कि इकोनॉमि‍क सि‍चुएशन को लेकर भी लोगों का सरकार से भरोसा उठा है। बता दें कि मार्च 2016 में 39.9 % लोगों के हालात सुधरने की बात कही गई थी। लेकिन जून 2017 के बीच ऐसा मानने वालों की संख्‍या में करीब 7 % की गि‍रावट हुई है। उसके साथ-साथ महंगाई पर चिंता जताने वालों की भी संख्या में बढ़ोतरी हुई है। मार्च 2016 में 77.3 % लोगों ने ये माना था। कि‍ कीमतें बढ़ी हैं। तो मार्च 2017 में इस आंकड़े में बढ़ोतरी हुई। जो बढ़कर 85.8 % तक पहुँच गया है।

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