कच्ची शराब पीने से एक ही गाँव के तीन घर बर्बाद

Jul 28, 2016

गोरखपुर: प्रदेश में कुटीर उद्योग का रूप ले चुकी कच्ची शराब ने बीते कई वर्षों में पूरे प्रदेश में सैकड़ो घरो की खुशियां छीन लिया।कितने मासूम अनाथ, सुहागिने विधवा और माँओं का आँचल सुना हो गया।

सरकारें आती, जाती रही, किन्तु किसी ने इस सामाजिक नासूर को मिटाने के लिए कोई पहल नही किया । कुछ दिनों पूर्व बाँदा जनपद में कच्ची से हुई मौतों को देखते हुए शासन के निर्देश पर अभियान चलाकर इसे खत्म करने की कागजी कोशिश की गयी थी, किन्तु वो भी महज़ चार दिन में ठंडी पड़ गयी।

जनपद के पिपराइच थाना क्षेत्र में पुलिस के शह पर कच्ची शराब का धंधा जोरो से फलफूल रहा है। इधर सप्ताह भीतर ही इसी थाना क्षेत्र के कैथवालिया के कच्ची शराब पीने से तीन की मृत्यु हो चुकी है, एक गंभीर हाल में जिला अस्पताल में भर्ती है। रामधनी पुत्र वैजनाथ उम्र 50 वर्ष की मृत्यु कच्ची अड्डे पर ही एक सप्ताह पूर्व , किशोर पुत्र विहारी उम्र 45 वर्ष की मृत्यु 24 जुलाई को पी कर आते समय रास्ते में , जेठू पुत्र कौलेसर उम्र 50 वर्ष की मृत्यु 25 जुलाई को हो चुकी है तथा छोटू पुत्र कौलेसर की गंभीर हालत में जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है जो जीवन व मृत्यु से संघर्ष कर रहा है।

विदित हो कि उक्त सभी घटनाये पुलिस के संज्ञान में है फिर भी बिना पोस्ट मार्टम के ही आनन फानन में अंतिम संस्कार कर दिया गया तथा मामला ठन्डे बस्ते में डालने की है ।

जानकारी के अनुसार पिपराइच रोड के विकास भारती चौराहे से उनौला स्टेशन व कैथवलिया गाँव जाने के लिये पिच सड़क गयी है जिसपर ग्राम सभा जंगल सुभान अली का सिवान है।

जंगल सुभान अली के इस रोड के सटे नव निर्मित केंद्रीय विधालय को जाने वाली नाला रोड व काली मंदिर पोखरे के किनारे वाकायदा झोपडी डाल कर कच्ची शराब भीड़ लगा कर पिलाई जाती है इसके अतिरिक्त विकास भारती से ही कैथवलिया जाने वाले मुख्य मार्ग पर मोटी प्लास्टिक डाल कर सुबह से ही देर रात तक दुकानदारी चलती है जिससे सैकड़ो घर उजड़ चुके है । इन अड्डो पर पुलिस वालों को भी आते जाते अक्सर देखा जाता है।

उनौला निवासी भगवानदास शर्मा का कहना है कि केंद्रीय विधालय को जाने वाले नाले पर मेरा खेत स्थित है जिसके नाले पर कच्ची के धंधा करने वाले जबरन झोपडी डाल कर कब्जा कर लिये है , कई बार हटाने के लिये बोल चुके फौजदारी पर आमदा हो जाते है जबकि वह सरकारी नाला है पर पुलिस संक्षरण के कारण बेबस हूँ।

ग्रामवासियो का कहना है कि अतिशीघ्र पुलिस सक्रीय हो कर कच्ची का अड्डा बन्द करवाते हुये झोपड़ियो को नही गिरवाती है तो पूरा का पूरा गाँव ही बर्बादी के करार पर है क्योंकि पूरा गांव मजदूरी पर निर्भर है जो कच्ची पी कर ही घर लौटते है।

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