रामदेव गोबर की आइसक्रीम भी बेचेंगे तो वो भी बिकेगी: चंद्रभान प्रसाद

Aug 19, 2016
नई दिल्ली। सामाजिक गैरबराबरी का परीक्षण करने के उद्देश्य से दलित चिंतक और कारोबारी चंद्रभान प्रसाद ने “दलित फूड्स” नाम से खाद्य प्रोडक्ट बाजार में उतारे हैं। इसके तहत आम का अचार, हल्दी, धनिया, मिर्च जैसे उत्पाद शामिल हैं और इन्‍हें ऑनलाइन बेचा जाएगा। ये उत्‍पाद दलित फूड्स डॉट कॉम और दलितशॉप डॉटकॉम नाम से दो वेबसाइट पर मिलेंगे।
बीबीसी को दिए गए इंटरव्यू में चंद्रभान ने बताया कि 2008 में वे अमेरिकन यूनिवर्सिटी के दौरान दलितों की बस्ती में रहे थे। वहां उन्हें 90 साल और उससे भी ज्यादा उम्र के दलित मिले। ये अचरज भरा था क्योंकि दलितों की औसत उम्र आम भारतीयों से कम होती है। इस दौरान उनके खान-पान के बारे में जानने की कोशिश की। इसी से इस तरह के प्रॉडक्‍ट लॉन्‍च करने का आइडिया आया।
बाबा रामदेव और श्री श्री रविशंकर के उत्‍पादों से तुलना पर चंद्रभान ने कहा कि इन लोगों का बड़ा कारोबार है। बाबा रामदेव की छवि ऐसी है कि वे गोबर की आइसक्रीम भी बेचेंगे तो वो भी बिक जाएगी। चंद्रभान प्रसाद के दलित फूड्स साइट पर वही उत्पाद मिलेंगे जो उनके यूनिट में तैयार हो रहे हैं। इस प्‍लेटफार्म पर कोई भी दूसरा दलित अपना उत्पाद बेच सकता है। चंद्रभान को ई-कॉमर्स फूड बिजनेस में सीआईआई (कन्फेडरेशन ऑफ इंडियन इंडस्ट्रीज) ने सहयोग किया है।
उन्‍होंने बताया कि दलितों का समाज गांव से बाहर होता था। उनके पास साधन नहीं थे, ऐसे में उन लोगों के 90-100 साल तक जीवित होने पर अचरज ही था, लेकिन वे लोग बताते थे कि बाजरे की रोटी खाते थे, ज्वार खाते थे। जब गेहूं की रोटी पहली बार उन लोगों ने खाई तो उनका पेट खराब हो गया। ऐसे लोगों से बातचीत के करीब आठ साल बाद चंद्रभान प्रसाद ने पांच लाख रूपये के निवेश के साथ दलित फूड्स नामक ब्राण्ड की शुरूआत की है। चंद्रभान प्रसाद बताते हैं, हमने खास हल्दी का इस्तेमाल किया है जो महाराष्ट्र के सूखे से प्रभावित इलाके वर्धा के दलित किसान के खेत में पैदा हुई है, धनिया बुंदेलखंड से मंगाया है, लाल मिर्च हम राजस्थान के मथानिया से मंगा रहे हैं।
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