रेल हादसा: लोगो ने बताया, मुस्लिम युवक अगर फरिश्ते बनकर न आते तो बचना मुश्किल था

Aug 21, 2017
रेल हादसा: लोगो ने बताया, मुस्लिम युवक अगर फरिश्ते बनकर न आते तो बचना मुश्किल था

उत्तर प्रदेश। मुजफ्फरनगर खतौली जहां रेल हादसा हुआ है। वहीं थोड़ी ही दुरी पर अहमद नगर नाम की एक बस्ती है। यह एक मुस्लिम बस्ती है, वही रेलवे पटरी के दूसरी ओर ‘जगत’ नाम की कॉलोनी और तहसील है यह इलाका हिंदू बाहुल्य क्षेत्र है। लेकिन जब यहां रेल हादसा हुआ तो धर्म और मजहब की सभी दीवारें टूट गईं। मुस्लिम और हिंदू युवकों ने साथ मिलकर ट्रेन में फंसे घायल लोगों को बहार निकला। घटना में घायल हुए लोगो का कहना है कि अगर मुस्ल‍िम युवक वक्त पर न आते तो बचना मुश्क‍िल था। कल शाम हुए इस हादसे में 23 लोगों की मौत हो गई है और 156 से ज्यादा लोग घायल हुए हैं।

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घटना में लोगो की मदद कर रहे अहमद नगर के निवासी मोहम्मद रिजवान और अनीस ने बताया कि, जिस वक्त यह हादसा हुआ वह अपने घर के बाहर खड़े थे। आवाज सुनकर वह भी घबरा गए कि आखिर हुआ क्या? लेकिन जैसे ही रेलवे ट्रैक की तरफ नजर पडी तो होश उड़ गए. ट्रेन पलट गई थी और वहां धुएं के गुब्बारे उड़ रहे थे. ट्रेन के डिब्बे से चीखों की आवाज आ रही थी. सब लोग दौड़ पड़े और घायलों को बाहर निकालने का काम फ़ौरन शुरू कर दिया गया। रिजवान ने बताया कि हमने एक ही डिब्बे से 40 से ज्यादा घायलों को बाहर निकाला 5-6 ऐसे थे जिनकी मौत हो चुकी थी। देवेंद्र ने बताया कि कई घायलों की हालत बेहद चिंता जनक थी. सभी घायलों को एंबुलेंस से अस्पताल भिजवाया जा रहा था. गांव से आए लोगों ने भी घायलों को बाहर निकलवाकर अस्पताल पहुंचाने का काम शुरू किया.

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इस घटना में घायल हुए संत हरिदास ने बताया कि, यह सब कुछ अचानक हुआ. तेज धमाके की आवाज के बाद डिब्बे एक-दूसरे के ऊपर चढ़ गए. चीख-पुकार मच गई. किसी को कुछ समझ नहीं आया कि आखिर हुआ क्या? कुछ होश आया तो डिब्बे पूरी तरह पलट चुके थे. लोग जान बचाने के लिए चिल्ला रहे थे. ऐसे में पास की मुस्लिम बस्ती से कुछ युवक दौड़कर आए और एक-एक कर डिब्बे में फंसे यात्रियों को बाहर निकालने लगे. ट्रेन में सफर कर रहे संत मोनीदास के मुताबिक अगर वक्त रहते मुस्लिम युवक उन्हें न बचाते तो मरने वालों की संख्या और ज्यादा हो सकती थी।

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