कांग्रेस में राहुल फामरूले को चलाने में आ रही है मुश्किल

Apr 04, 2016

कांग्रेस में युवाओं को टिकट दिलाने का उपाध्यक्ष राहुल गांधी का फार्मूला असम में तो चल गया, लेकिन पश्चिम बंगाल ने इसने दम तोड़ दिया.

पश्चिम बंगाल में पार्टी के उम्मीदवारों की औसत आयु 65 वर्ष है. कई उम्मीदवारों की उम्र इससे भी 15 साल ज्यादा है. केरल में भी राहुल के फामरूले में पेंच फंसा हुआ है. दरअसल, मुख्यमंत्री और प्रदेश अध्यक्ष के बीच यह विवाद सुलझ नहीं रहा है कि जीत सकने वाले उम्मीदवार को टिकट दिया जाए या फिर साफ छवि वाले नेता को.

राहुल गांधी का युवाओं को टिकट देने का फामरूला यही रहा है कि इसके जरिए नए चेहरे और साफ छवि वाले उम्मीदवार सामने लाए जाएं. नए चेहरे सामने लाने के लिए 35-45 साल की उम्र वाले युवाओं को अधिक टिकट दिए जाएं. इस फामरूले में यह भी है कि अगर ये युवा हार भी जाएं तो इनको उक्त चुनाव क्षेत्र में ही काम करने दिया जाए ताकि आगे चुनाव जीत सकें. पर विधानसभा चुनावों में युवाओं को कम टिकट दिए जा रहे हैं, उससे तो यही लगता है कि कांग्रेस में राहुल फामरूले को चलाने में मुश्किल आ रही है.

इधर, दिल्ली में कांग्रेस के नेताओं के बीच इस पर बहस भी हो रही है कि युवाओं को टिकट देने वाले राहुल फामरूले पर ठीक से अमल क्यों नहीं हो रहा है. बात यह भी हो रही है कि पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु जैसे राज्य जहां पार्टी खुद सरकार बनाने की स्थिति में नहीं है, वहां युवाओं को क्यों नहीं आजमाया जा सकता. पश्चिम बंगाल में राज्य इकाई ने यह कहकर अधिक उम्र वाले नेताओं को टिकट दिलाए  कि बुजुर्ग नेताओं को राज्य में लोग जानते हैं, युवाओं को कोई नहीं पहचानता.

असम में मुख्यमंत्री तरुण गोगोई और विधानसभाध्यक्ष समेत तीन उम्मीदवार 85 वर्ष या उससे अधिक आयु वाले हैं. साठ से अधिक आयु वाले 20 नेता टिकट पा सके हैं. 40% तक युवा नेताओं को टिकट मिला, जिसका श्रेय राहुल गांधी को जाता है. हालांकि महिलाओं को इस बार पिछली बार से कम ही टिकट मिल सका है. सहयोगी संगठन महिला कांग्रेस ने भी अपने कार्यकर्ताओं के लिए टिकट मांगा था, पर उनकी नहीं सुनी गई. महिला कांग्रेस के प्रभारी राहुल गांधी ही है और उन्होंने महिलाओं को भी ज्यादा टिकट दिलाने का वादा किया था.

कांग्रेस सांसद और पूर्व प्रदेश अध्यक्ष भुवनेर कलिता भी पूछने पर कहते हैं कि  युवाओं को अच्छी संख्या में टिकट मिला है और ये सब राहुल गांधी की कोशिशों की वजह से संभव हुआ. उन्होंने कहा कि नए चेहरों की वजह से पार्टी को विरोधियों से मुकाबला करने में सुविधा हुई है. विधानसभा चुनावों में युवाओं को अधिक टिकट देने पर सहमति नहीं बनने के बाद समझा जा रहा है कि  इस विषय पर पार्टी में गहराई से चर्चा होगी. कहा यह भी गया है कि अब शायद राहुल उम्मीदवारों को लेकर कोई नया कोई फामरूला सुझाएं, जो पार्टी में दूसरे वरिष्ठ नेताओं को भी स्वीकार्य हो.

 

 

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