US करेगा भारत में एफ-16 लड़ाकू विमानों का प्रोडक्शन

Jun 24, 2016

अमेरिकी विमान निर्माता कम्पनी लाकहीड मार्टिन अपने एफ-16 लड़ाकू विमानों का उत्पादन भारत के ‘मेक इन इंडिया’ के तहत करने के लिए तैयार है.

भारतीय वायुसेना के लड़ाकू विमानों के बेड़े में एक-एक कर होती जा रही भारी कमी को जल्दी भरने के लिए फ्रांसीसी 36 राफेल विमानों का सौदा अभी ‘होल्ड’ पर रखा गया है. इस दशा में अमेरिकी विमान निर्माता कम्पनी लाकहीड मार्टिन अपने एफ-16 लड़ाकू विमानों का उत्पादन भारत के ‘मेक इन इंडिया’ के तहत करने के लिए बेचैन है.

कम्पनी की उम्मीदें तब और बढ़ गई हैं, जब सरकार ने रक्षा क्षेत्र में एफडीआई की सीमा 48 प्रतिशत से बढ़ाकर 100 फीसद कर दी है. पिछले दिनों जब प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी अमेरिका के दौरे पर गए थे, तो कम्पनी ने मोदी से भारत में विमानों की असेम्बलिंग प्रोडक्शन करने की लाइन पर बातचीत की थी.

रक्षा मंत्रालय के अधिकारिक सूत्रों ने बताया कि राफेल विमानों की कीमत को लेकर फ्रांसीसी डसाल्ट कम्पनी से सौदेबाजी अभी भी फाइनल मुकाम पर न पहुंचने की दशा में, अमेरिकी एफ-16 विमानों का प्रोडक्शन भारत के लिए एक अनुकूल और फायदेमंद सौदा हो सकता है.

मंत्रालय के दो वरिष्ठ अधिकारियों को लाकहीड मार्टिन के प्रपोजल का अध्ययन करने और कम्पनी से बातचीत के लिए लगाया गया है. लाकहीड का कहना है कि भारत से एग्रीमेंट होते ही एफ-16 अपनी असेम्बली प्रोडक्शन यूनिट को भारत स्थानान्तरित कर देगा. कम्पनी का कहना है कि एफ-16 का भारत में उत्पादन भारत के लिए दो तरह से अनुकूल है. एक, यह मोदी सरकार के ‘मेक इन इंडिया’ कार्यक्रम को पूरा करने वाला है और दूसरा यह भारतीय वायुसेना की जरूरतों को पूरा करने वाला है.

पिछले दिनों एक साक्षात्कार में रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर ने संकेत दिया था कि भारत इस तरफ भी देख रहा है कि कोई विदेशी सैन्य कम्पनी हमारे देश में लड़ाकू  विमानों का उत्पादन करे. उन्होंने कहा था कि विमानों का सौ फीसद असेम्बलिंग नहीं, बल्कि हम चाहते हैं कि विदेशी कम्पनी यहां भारतीय पार्टनरशिप के साथ काम करे. कम्पनी यहां ट्रान्सफर आफ टेक्नोलोजी के तहत ज्यादातर आइटम्स का उत्पादन भी करे.

 उन्होंने कहा था कि हमें पता है कि सौ फीसद स्वदेशीकरण संभव नहीं है. सारे प्रयासों के बाद भी ‘स्वदेशी’ लाइट काम्बैट एयरक्राफ्ट (एलसीए) तेजस सिर्फ 40 फीसद ही स्वदेशी हो पाया.

अमेरिका की विमान निर्माता कम्पनी लाकहीड मार्टिन (एफ-16) ही नहीं, बल्कि बोईग भी भारत में अपने एफ-18 लड़ाकू विमानों का प्रोडक्शन करना चाहती है. यहां तक कि भारत के लिए लड़ाकू विमानों के सौदे में राफेल से अन्तिम दौर में मात खाई यूरोपियन ‘यूरोफाइटर’ की भी उम्मीदें जग गई हैं. कम्पनी ने फिर से बातचीत के प्रयास तेज कर दिए हैं.

स्वीडिश लड़ाकू विमान ‘साब’ के निर्माता भी भारत में फिर से अपनी उम्मीदों को परवान चढ़ाने के लिए प्रयासरत है. रक्षा क्षेत्र में 100 फीसद एफडीआई होने से विदेशी कम्पनियों की बाछें खिल गई हैं.

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