राष्ट्रपति से सम्मानित महिला कांस्टेबल हुईं छेड़खानी का शिकार, ट्वीट कर मांगी थी मदद

Jan 27, 2018
राष्ट्रपति से सम्मानित महिला कांस्टेबल हुईं छेड़खानी का शिकार, ट्वीट कर मांगी थी मदद

एक तरफ तो देशभर में 69वां गणतंत्र दिवस पूरे जोशो खरोश और देशभक्ति की भावना के साथ मनाया गया। वहीं ये भी सच है कि आज भी देश में बहन-बेटियां सुरक्षित नहीं हैं, चाहे वे अकेले हों या फिर भरी भीड़ में, हैवानों की नजरें उन पर हर जगह हैं। जिसका सुबूत ये शर्मनाक खबर दे रही है।

बता दें कि गरीबों की मसीहा के नाम से मशहूर और राष्ट्रपति पुरस्कार प्राप्त दुर्ग की आरक्षक स्मिता तांडी के साथ ट्रेन में छेड़छाड़ और बदतमीजी का मामला सामने आया है। मिली जानकारी के मुताबिक स्मिता शुक्रवार को ट्रेन से बिलासपुर की ओर एक शादी समारोह में शामिल होने जा रही थी। लेकिन उनके साथ ट्रेन में एक असिस्टेंट प्रोफेसर ने छेड़खानी शुरू कर दी। लेकिन स्मिता ने उससे किसी तरह खुद को बचाया और उसने आरपीएफ भाटापारा से संपर्क किया और साउथ बिहार एक्सप्रेस के भाटापारा पहुंचने से पहले ही तमाम आला-अधिकारी स्टेशन पहुंच गए। आरोपी युवक को स्टेशन में ही उतार लिया गया, इस घटना की जानकारी जैसे ही सोशल मीडिया में वायरल हुई न केवल देश बल्कि विदेशों में मौजूद स्मिता के काम से प्रभावित लोगों ने घटना की जानकारी लेने फोन करना शुरू कर दिया।

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इस घटना के चश्मदीद बताते हैं कि छेड़खानी करने के बाद जब स्मिता ने आरोपी की फोटो लेने की कोशिश की तो बात बढ़ी और नौबत हाथा-पाई तक पहुंच गई थी, लेकिन गनीमत ये रही की ट्रेन इससे पहले ही भाटापारा रेलवे स्टेशन पहुंच गई और मामला किसी तरह थाने पहुंच कर शांत हुआ और आरोपी को हिरासत में ले लिया गया। जिसकी जानकारी उन्होंने ट्वीट कर अपने ट्वीटर अकाउंट पर दी है। लेकिन अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब दिनदहाड़े राष्ट्रपति पुरस्कार से नवाज़ी गई पुलिस आरक्षक के साथ ऐसी घटना हो सकती है तो रात में सफर करने वाली आम महिलाएं कितनी सुरक्षित हैं?

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आपकी जानकारी के लिए बता दें कि स्मिता तांडी छत्तीसगढ़ पुलिस में कार्यरत हैं। जिनको दो साल पहले राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी ने सम्मानित किया था। इतना ही नहीं बल्कि वे जीवनदीप समूह बनाकर जरूरतमंदों को इलाज उपलब्ध कराने में अहम भूमिका निभा रही हैं। फेसबुक पर उनके आठ लाख से भी ज्यादा फॉलोअर्स हैं।

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