यमुना के बाढ़ क्षेत्र को नुकसान, राष्ट्रपति का सांस्कृतिक समारोह में भाग न लेने का फैसला

Mar 08, 2016

यमुना के बाढ़ क्षेत्र को नुकसान पहुंचाने की खबरों के बीच राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने श्रीश्री रविशंकर के सांस्कृतिक कार्यक्रम में भाग नहीं लेने का फैसला किया है.

हालांकि राष्ट्रपति भवन ने कार्यक्रम में नहीं जाने के फैसले को अपरिहार्य कारण बताया. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का शुक्रवार को समारोह का उद्घाटन करने का कार्यक्रम है और पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार राष्ट्रपति को रविवार को इसके समापन समारोह में भाग लेना था.

कार्यक्रम 11 से 13 मार्च तक होगा. इस कार्यक्रम के लिए डीएनडी फ्लाईओवर से लेकर मयूर विहार तक पूरा यमुना खादर को बराबर कर दिया गया है. चारों तक टेंट लगा दिए गए हैं. विशाल मंच बनाया गया है. राष्ट्रपति भवन के एक अधिकारी के मुताबिक, अपरिहार्य कारणों से राष्ट्रपति इस समारोह में हिस्सा नहीं ले पाएंगे.

आयोजकों को इस समारोह में 35 लाख लोगों के हिस्सा लेने की उम्मीद है. हालांकि विशेषज्ञों ने यमुना के जलग्रहण क्षेत्र में इसके आयोजन के कारण पर्यावरण को होने वाले संभावित नुकसान को लेकर चिंता व्यक्त की है. पूर्वी दिल्ली में यमुना नदी पहले से ही प्रदूषित है.

तीन दिवसीय महोत्सव में आर्ट ऑफ लिविंग फाउंडेशन योग और ध्यान के सत्रों का आयोजन करेगा. संस्कृति विद्वान शांति प्रार्थनाएं करेंगे और दुनियाभर की परंपरागत सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दी जाएंगी.

श्रीश्री रविशंकर ने आयोजन का बचाव करते हुए कहा है कि अगर किसी अन्य देश में ऐसा आयोजन होता तो उनका भव्य स्वागत किया जाता. महोत्सव के महत्व की तुलना ओलंपिक से करते हुए उन्होंने कहा कि एनजीटी की रिपोर्ट पक्षपातपूर्ण है.

उन्होंने कहा कि एनजीटी द्वारा गठित समिति पक्षपातपूर्ण है और आयोजकों ने कार्यक्रम के लिए एक भी पेड़ नहीं काटा है. उन्होंने इस दावे को खारिज कर दिया कि महोत्सव के लिए यमुना के जलग्रहण क्षेत्र को तबाह किया जा रहा है. उन्होंने कहा कि यह पर्यावरण हितैषी उत्सव है.

 

 

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