कर्जे में डूबे राम दयाल ने राष्ट्रपति,प्रधानमंत्री आवास के पास आकर की खुदकुशी

May 13, 2016

इस देश में यह कैसी विडंबना चल पड़ी है। पढ़े-लिखे नौजवान कहीं संस्थानों के कमरों में आत्महत्या कर रहे तो कहीं इस देश के मजदूर किसान और बेरोजगार अपने परिवार का ठीक से पालन-पोषण न कर पाने के कारण खुदकुशी करने पर मजबूर है। वो भी हर जगह से थक-हार कर तमाम शहरों से निकलकर राजधानी दिल्ली को अपना अंतिम स्थान चुन रहें हैं शायद इसलिए कि यहाँ से शायद उनके पीछे परिवार की देखरेख सुनवाई हो सके !

अभी कुछ दिन पहले ही राजस्थान के रहने वाले किसान गजेंद्र ने जंतर-मंतर पर मीडिया औऱ राजनेताओं की मौजूदगी में आत्महत्या कर ली थी। गजेंद्र पेशे से किसान था। बैंकों का कर्ज और किसानी फसल का लगातार नुकसान झेल न पाने की वजह से गजेंद्र ने यह दर्दनाक कदम उठाया। पूरे भरे-पूरे परिवार को अलविदा कहकर गजेंद्र चला गया।

ऐसे कई किसान देशभर में आत्महत्या कर रहें है। पर शायद दिल्ली जहाँ पूरे देश से राजनेता चुनकर यहीं के हो जाते है वो जगह गजेंद्र को ठीक लगी ताकि उसे पूरी तरह व्यवसाय बन चुकी मीडिया में जगह मिले औऱ उसके बाद उसके परिवार को मदद मिल सके। विदर्भ औऱ बुंदेलखंड इऩ माध्ममों से दूर है जिस वजह से वहाँ के किसान आत्महत्या करते है सिर्फ आंकड़ो में ही रह जाते है। उनके पीछे उनके परिवार को देखने वाला कोई नहीं रह जाता। कल राजधानी दिल्ली में इसी तरह का मामला देखने को मिला। लुटियन जोन यानि राष्ट्रपति,प्रधानमंत्री औऱ तमाम सांसदों के आवास वाला इलाका। जहाँ की सुरक्षा चाक-चौंबंद हमेशा रहती है। वहीं कल रात मध्यप्रदेश के राम दयाल ने विजय चौक इलाके में पेड़ से लटककर जान दे दी। राम दयाल काफी कर्जे में दबे हुए थे। उसके पास से 13 पन्ने का सुसाइट नोट भी बरामद किया गया। जिसमें इस कदम के उठाने की वजह बताई गई।

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अब क्या किसानों औऱ लोगों को ऐसे कृत्यों के लिए राजधानी दिल्ली आना होगा! जो कि काफी चिंताजनक है औऱ अपराधिक भी। लेकिन राजनेताओं के महानगरीय और राजधानी जीवन में ढल जाना। अपने क्षेत्र के लोगों की जनसमस्याएं न सुनना औऱ न ही क्षेत्र में जाना। इतना ही नहीं कई-कई किलोमीटर चलकर उपचार औऱ तमाम स्थानीय कामों के लिए दिल्ली आना-जाना जनता के लिए काफी परेशान करने वाला काम है जो आज के राजनेता कर रहें है। इसमें एक बड़ी भूमिका इस देश के तमाम माध्यम चैनल औऱ अखबार भी निभा रहें है। प्रथम पेज औऱ प्राइट टाइम लोकेशन पर महानगरीय समस्याएं पेश करना औऱ उन किसानी और आंचलिक समस्याओं को तवज्जों ने देना इस अपराधिक कृत्य को कहीं न कहीं बढावा दे रहा है। कल गजेंद्र आज राम दयाल ऐसे कल आने वाले कल में औऱ कोई भी नाम हो सकता है !

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