बराक ओबामा ने आतंकवाद को रोकने में मानी अपनी असफलता

Aug 05, 2016

वाशिंगटन। अमेरिका के राष्‍ट्रपति बराक ओबामा ने एक बार फिर से आईएसआईएस के आतंकियों को वॉर्निंग दी है। साथ ही ओबामा ने साफ कर दिया है कि अफगानिस्‍तान से अभी अमेरिका फिलहाल सेना को पूरी तरह से नहीं हटाएगा। ओबामा ने साफ कर दिया है कि जब तक आईएसआईएस का खात्‍मा नहीं होता तब तक अफगानिस्‍तान में सेना तैनात रहेगी।

क्‍यों अफगानिस्‍तान में रहेगी यूएस आर्मी

गुरुवार को ओबामा ने कहा अफगानिस्तान में अमेरिकी सेना की मौजूदा स्थिति को बरकरार रखने के उनके फैसलों के पीछे की सबसे बड़ी वजह आईएसआईएस की मौजूदगी को लगातार कमजोर करना है।

ओबामा ने इस दौरान जुलाई में आईएसआईएस के टॉप कमांडर उमर खलीफा की मौत का जिक्र भी किया। उन्‍होंने कहा कि अफगानिस्‍तान में खलीफा को मारकर अमेरिकी सेना ने आईएसआईएस को एक बड़ा झटका दिया था।

5500 नहीं 8500 सैनिक अफगानिस्‍तान में

ओबामा ने ऐलान किया है कि वर्ष 2017 जनवरी में अमेरिका के 8500 सैनिका अफगानिस्‍तान में डेप्‍लॉय रहेंगे। पहले ओबामा ने सिर्फ 5500 सैनिकों को ही डेप्‍लॉय करने की घोषणा की थी।

ओबामा ने यह भी कहा कि आने वाले समय में अमेरिकी सेना साझीदारों के साथ मिलकर आईएसआईएस के खिलाफ हमलों का और बढ़ाएगी।

मानी अपनी असफलता

ओबामा के मुताबिक उनकी चिंता सिर्फ यूरोप या फिर अमेरिका को ही लेकर नहीं है बल्कि अफगानिस्‍तान, लेबनान, इराक और उन तमाम देशों को लेकर है जिनके बारे में लोग ज्‍यादा जिक्र नहीं करते हैं।

ओबामा ने पहली बार यह बात स्‍वीकार की कि उनके आठ वर्षों के कार्यकाल में आतंकवाद को पूरी तरह से खत्‍म किया जा सकता था लेकिन ऐसा नहीं हो सका।

अगले राष्‍ट्रपति पर टिकीं उम्‍मीदें

उन्‍होंने कहा कि उन्‍हें इस बात में कोई हैरानी नहीं है। साथ ही आने वाले राष्‍ट्रपति से उम्‍मीद जताई के नए राष्‍ट्रपति के कार्यकाल में आतंकवाद पर जरूर लगाम लग सकेगी।

ओबामा के मुताबिक सिर्फ सैन्य रणनीति की ही नहीं बल्कि एक पारंपरिक आतंकवाद-रोधी रणनीति की जरूरत है। एक ऐसी रणनीति जो इन नेटवर्कों को नष्ट करने के लिए, इन लोगों द्वारा हमले बोले जाने से पहले ही इन्हें पकड़ लिए जाने पर आधारित हो।

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