करते हैं पूजा तो इन बातों का रखें खास ध्यान

May 05, 2017
करते हैं पूजा तो इन बातों का रखें खास ध्यान

सुबह के समय हम पूजा इसलिए करते हैं क्योंकि सुबह के समय दैवीय शक्तियां अधिक बलवान होती हैं और शाम के समय असुरी शक्तियां। भगवान को प्रसन्न करने के लिए हम सुधर पूजा-पाठ करते हैं और सुबह के समय पूजा पाठ करना बहुत शुभ और अच्छा माना जाता है। शाम के समय हम पूजा-पाठ इसलिए करते हैं ताकि असुरी शक्तियां कम हो जाए। असुरी शक्तियां के प्रभाव को कम करने के लिए सूरज ढलने के बाद ही पूजा करनी चाहिए। इसलिए सुबह शाम दोनों समय की की गई पूजा का अपना ही महत्व है ।

शाम के पूजा के समय इन बातों का रखें खास ध्यान
तुलसी के पत्ते और गंगाजल कभी बासी नहीं होते हैं इसके अतिरिक्त और कोई भी समान बासी हो जाता है इसलिए उसका उपयोग ना करें। सर्यास्त के उपरांत देवी देवतां विश्राम के लिए चले जाते हैं इसलिए शाम के समय पूजा करते हो शंख और घंटी ना बजाएं। सूर्य ढलने के बाद कभी भी वनस्पतियों से छेड़छाड़ नहीं करनी चाहिए। इसलिए आपको जो भी फल, फूल या जो भी फूलों के पत्ते चढ़ाने हैं उसे दिन में ही तोड़े। उन्हें शाम को ना तोड़े।

श्री हरि विष्णु और श्री हरि विष्णु के किसी भी अवतार की पूजा तुलसी पत्र के बिना पूरी नहीं होती। उनका भोग भी बिना तुलसी पत्र के नहीं लगता है क्योंकि अगर से तुलसीपत्र नहीं रहता तो भगवान को को ग्रहण नहीं करते हैं।

भोर के फूटते ही सूर्य देवता अपना प्रकाश चारों ओर फैला देते हैं दिन के समय सूर्य की पूजा करें रात को नहीं।
रात को सोने से पहले अपने मंदिर का परदा गिरा दें क्योंकि पर्दा गिराने से भगवान को विश्राम करने में किसी भी तरह की बाधा नहीं होगी । अगर मंदिर के कपाट एक बार बंद कर दिए हैं तो उसे दोबारा सुबह ही खोलें।

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