प्रदूषण के कारण दिल्ली में जीवन प्रत्याशा छह साल कम हो गई है, केंद्र ने इस अध्ययन को किया खारिज

Jun 09, 2016

केंद्र सरकार ने उस अध्ययन को खारिज कर दिया जिसमें दावा किया गया था कि वायु प्रदूषण के कारण दिल्ली में जीवन प्रत्याशा छह साल कम हो गई है.

सरकार ने कहा कि यूरोप और अमेरिका में किए गए शोध के आधार पर यह दावा किया गया है और भारत को ”बदनाम” करने के लिए इसे बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया गया.

केंद्रीय पर्यावरण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने यह दावा भी किया कि पृथ्वी विज्ञान विभाग अध्ययन के निष्कर्षों से सहमत नहीं है. उन्होंने यह बातें तब कही हैं जब कल ही पर्यावरण मंत्रालय ने वह बयान वापस ले लिया जिसमें उनके हवाले से कहा गया था कि अध्ययन के निष्कर्ष सामने आने का समय ”प्रेरित” है, क्योंकि यह ऐसे समय में जारी किया गया जब प्रधानमंत्री अमेरिका के दौरे पर हैं. बयान जारी करने के कुछ ही देर बाद पर्यावरण मंत्रालय ने कल इसे वापस ले लिया था.

केंद्रीय मंत्री जिस अध्ययन पर सवाल उठा रहे हैं वह इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ ट्रॉपिकल मीटियोरोलॉजी (आईआईटीएम) की ओर से किया गया जो पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के तहत एक स्वायत्त संस्था है. अमेरिका के कोलारेडो स्थित नेशनल सेंटर फॉर एटमॉस्फेयर रिसर्च (एनसीएआर) के साथ मिलकर आईआईटीएम के वैज्ञानिकों ने यह अध्ययन किया.

जावड़ेकर ने मंगलवार को एक संवाददाता सम्मेलन में कहा, ”हम एक तथाकथित आलेख में किए गए इस दावे को खारिज करते हैं कि प्रदूषण के कारण भारतीय अपनी जिंदगी के छह साल गंवा रहे हैं. यह अध्ययन क्षेत्रीय वायुमंडलीय रसायन मॉडल पर आधारित है.”

मंत्री ने एक संवाददाता सम्मेलन में कहा, ”यूरोप और अमेरिका में किए गए अध्ययनों के आधार पर यह शोध किया गया है जिसे भारत पर लागू किया जा रहा है. यह अध्ययन सैंपलिंग, जमीनी अध्ययन और दीर्घकालिक पर्यवेक्षण पर आधारित नहीं है . लिहाजा यह पूरी तरह गैर-जरूरी है और भारत को बदनाम करता है.”

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