‘बलूचिस्तान पर PM की टिप्पणी बलूच लोगों के प्रति चिंता का इजहार’

Aug 18, 2016

सरकार का मानना है कि प्रधानमंत्री की टिप्पणी पाकिस्तान के समस्याओं से घिरे क्षेत्र के लोगों के बारे में चिंता की अभिव्यक्ति है तथा भारत की मानवता उसकी सीमा तक सीमित नहीं है.

स्वाधीनता दिवस के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के संबोधन में बलूचिस्तान के बारे में की गयी टिप्पणी को लेकर चल रही बहस के बीच सरकार का मानना है कि यह पाकिस्तान के समस्याओं से घिरे क्षेत्र के लोगों के बारे में चिंता की अभिव्यक्ति है तथा भारत की मानवता उसकी सीमा तक सीमित नहीं है.

सरकारी सूत्रों ने इस बारे में सरकार के विचारों का संकेत देते हुए कहा, ‘‘यह चिंता की अभिव्यक्ति थी. हम देश के भीतर के साथ-साथ बाहर भी लोगों के लिए महसूस करते हैं.

यदि आप हमसे उम्मीद करते हैं कि हम देश के भीतर लोगों के बारे में गंभीरता से महसूस करें तो हम मानवता केवल मेरी सीमाओं तक सीमित नहीं है.’’

उन्होंने कहा कि यह बयान अचानक नहीं आया है तथा इसमें बलूचिस्तान के उत्पीड़ित लोगों के बारे में प्रधानमंत्री की चिंता झलकती है.

 

उन्होंने कहा, ‘‘यह बेहद स्वाभाविक है.’’ उन्होंने कहा कि मोदी की टिप्पणी से इंगित होता है कि वह बलूचिस्तान में मानवाधिकार की स्थिति तथा पाकिस्तान की सेना द्वारा की जा रही ज्यादतियों से चिंतित हैं.

सूत्रों ने कहा कि भारत किसके साथ समन्वय करेगा तथा नयी दिल्ली बलूचिस्तान में क्या करेगा, ये सवाल अप्रासंगिक एवं समय पूर्व हैं.

प्रधानमंत्री ने स्वाधीनता दिवस पर अपने संबोधन में सोमवार को पाक अधिकृत कश्मीर, गिलगित एवं बलूचिस्तान की स्थिति का उल्लेख किया था और कहा था कि वहां के लोगों ने उनके मुद्दे उठाने के लिए उनका आभार जताया है.
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