सर्वदलीय बैठक में PM ने घाटी के लोगों को दिलाया भरोसा

Aug 13, 2016

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने शुक्रवार को कहा कि सरकार जम्मू और कश्मीर में सभी वर्ग के लोगों की शिकायतों को संविधान के अनुरूप दूर करने को तैयार है.

लेकिन साथ ही स्पष्ट किया कि देश की अखंडता के साथ कोई समझौता नहीं किया जाएगा.

मोदी ने कश्मीर पर सर्वदलीय बैठक में पाक प्रायोजित आतंकवाद को घाटी में अशांति की मूल वजह बताया. बैठक में कश्मीर में भाजपा की गठबंधन सहयोगी पीडीपी और विपक्षी दलों ने भी शिरकत की. चार घंटे तक चली बैठक के दौरान कुछ विपक्षी दलों ने सरकार से कहा कि वह घाटी के कुछ हिस्सों से अफ्सपा हटाने और पैलेट गन के इस्तेमाल पर रोक लगाने जैसे विश्वास बहाली उपाय तत्काल करे.

कश्मीर के हालात पर विचार के लिए बुलाई गई इस महत्वपूर्ण बैठक में यह सुझाव भी दिया गया कि हालात का जायजा लेने के लिए एक सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल कश्मीर का दौरा करे, लेकिन सरकार ने विपक्षी पार्टियों की मांगों पर कोई वादा नहीं किया.

 

पीएम मोदी ने इस मौके पर पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर और बलूचिस्तान में मानव अधिकारों के उल्लंघन के लिए भी पाकिस्तान को आड़े हाथों लिया और कहा कि वहां होने वाले अत्याचारों के लिए उसे अन्तरराष्ट्रीय समुदाय को जवाब देना होगा. सरकार की कश्मीर नीति के मुख्य बिंदुओं को साझा करते हुए मोदी ने विदेश मंत्री से कहा कि वह विश्व के विभिन्न भागों में रहने वाले पाक अधिकृत कश्मीर के लोगों से संपर्क कर इलाके की दुर्दशा के बारे में जानकारी हासिल करें और फिर उसे अन्तरराष्ट्रीय समुदाय के साथ साझा करें.

सरकार के प्रयासों में राज्य के सामान्य लोगों तक पहुंच बनाना और कश्मीरी युवकों को राज्य की आर्थिक गतिविधियों में समाहित करना शामिल है. बैठक में भाग लेने के बाद माकपा महासचिव सीताराम येचुरी ने कश्मीर घाटी में सामान्य स्थिति बहाल करने के लिए सभी पक्षों के साथ बातचीत तत्काल शुरू करने की मांग की और सरकार से वहां के अशांत हालात पर काबू पाने के लिए पैलेट गन के इस्तेमाल पर रोक सहित विश्वास बहाली के उपाय करने को कहा.

बैठक के बारे में पूछे जाने पर जेटली ने कहा कि, ‘इस बात पर सहमति थी कि आतंकवाद अथवा पृथकतावाद पर कोई समझौता नहीं होगा. सुरक्षा चौकसी सबसे ऊपर होगी.

बैठक के दौरान कांग्रेस और वाम दलों ने मुख्य धारा की और गैर मुख्य धारा की पार्टियों तथा अन्य संबद्ध पक्षों के साथ बातचीत का आह्वान किया और पैलेट गन के इस्तेमाल पर रोक लगाने की हिमायत की. कांग्रेस के नेता गुलाम नबी आजाद ने इस बात पर जोर दिया कि सबसे जरूरी है कि ‘जख्मों पर मरहम लगाया जाए और बातचीत के दरवाजे बंद नहीं किए जाएं.

लोगों और खास तौर पर कश्मीर के युवकों के दिल और दिमाग को जीतना होगा. बैठक में सबसे पहले अपनी बात रखने वाले पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने कहा कि भारत सरकार को हालात को बेहतर बनाने के लिए कोई योजना बनानी चाहिए. सिंह ने कहा, ‘हम सरकार को आासन देते हैं कि कश्मीर मसले को हल करने के लिए जो भी कदम उठाया जाएगा उसे हमारा पूरा समर्थन होगा.’

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