PM मोदी की मानवता विरोधी नीति राष्ट्र को कर रही है तबाह, गाये की जगह बेचीं जा रही है बेटियां

May 06, 2016

महाराष्ट्र : मोदी सरकार की मानवता विरोधी नीति राष्ट्र को तबाह कर रही है ये कहना है सूखाग्रस्त मराठवाड़ा के उस्मानाबाद में घुमंतू कमलीबाई का ।
डीएनए से बातचीत में उन्होंने कहा, “गोमांस पर प्रतिबंध लगाने के लिए सरकार का धन्यवाद क्यूँकि अब कोई भी उसे (गाय) खरीदना नहीं चाहता है। इस मज़बूरी की वजह से हमें अपनी बेटी को बेचना पड़ा |

कावेरी को सदियों पुरानी देवदासी परंपरा जो ऊँची जाति के पुरुषों द्वारा नीची जाति की लड़कियों के लिए बनायी गयी देवदासी प्रथा के लिए समर्पित कर दिया गया है |हालांकि लड़कियों को देवदासी के रूप में रखे जाने को 1984 के बाद से आधिकारिक तौर पर गैर कानूनी घोषित कर दिया गया था |9 और 10 वर्ष की लड़कियों को इस तरह से देह व्यापर के लिए बेचा जाना मोदी सरकार की बेटी बचाओ और सेल्फी विद डॉटर जैसी योजनाओं की नाकामी और मोदी सरकार की मानवता विरोधी नीतियों का परिणाम है |

देवदासी पुनर्वास कार्यक्रम के बेलगाम जिले के अधिकारी एमके कुलकर्णी ने इस मामले की जानकारी होने से इनकार करते हुए कहा कि इस तरह का कोई मामला सामने नहीं आया है | हमारे अधिकारी और मंदिर के पुजारियों जागरूक कर रहे हैं कि अगर इस तरह का कोई मामला सामने आये तो फ़ौरन पुलिस को सूचित किया जाए |एमके कुलकर्णी के बयान के बिलकुल विपरीत महिला एवं बाल विकास मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार करीब 50,000 देवदासियों के मामले अभी भी मौजूद हैं |

26 मई से ज़रा मुस्कुरा दो शीर्षक से शुरू होने जा रही लघु फिल्मों की एक श्रृंखला जिसमें मोदी सरकार के दो साल पुरे होने पर उनकी उपलब्धियों के बारे में दिखाया जायेगा | इन हालात को देखते हुए एक प्रधानमंत्री होने के नाते वास्तव में मोदी सरकार की ये बहुत बड़ी उपलब्धि है कि काल्पनिक महाशक्ति जहां 330 मिलियन लोग भुखमरी के कगार पर हैं परिवार का खर्च पूरा करने के लिए मवेशियों के स्थान पर लड़कियों को बेचा जा रहा है इसके रोकथाम के उपाय के लिए और सरकारी मशीनरी पूरी तरह नाकाम है |

राजेंद्र सिंह, पानी संरक्षणवादी और स्टॉकहोम जल पुरस्कार 2015 के विजेता का कहना है कि‘भारत का सूखा मानव निर्मित है, क्यूँकि लोग पानी की कमी के बारे में जागरूक और गंभीर नहीं हैं’, आपके पास रिजर्व पुलिस है रिजर्व सेना है लेकिन रिजर्व पानी नहीं है ये सरकार की बहुत बड़ी नाकामी है |
अर्थशास्त्री और महाराष्ट्र राज्य योजना आयोग के पूर्व सदस्य एच एम देसरडा ने कहा कि सूखा एक वैचारिक विफलता है और इस वैचारिक विफलता और एक वैचारिक पागलपन का शिकार हजारों मासूम लड़कियां हो रही हैं |

 

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