PM मोदी की कोशिशों को लगा झटका, चीन बना भारत की NSG सदस्यता में रोड़ा

Jun 20, 2016

परमाणु आपूर्तिकर्ता समूह (एनएसजी) में भारत की सvदस्यता को लेकर चीन ने आखिरकार सोमवार को अपना रंग दिखा ही दिया और इससे प्रधानमंत्री की कोशिशों को झटका लगा है.

चीन ने कि परमाणु आपूर्तिकर्ता समूह (एनएसजी) में देशों को शामिल करने को लेकर सदस्यों में मतभेद बना हुआ है और दक्षिण कोरिया की राजधानी सियोल में इस सप्ताह होने वाली एनएसजी की बैठक के एजेंडे में यह मुद्दा शामिल भी नहीं है.

इससे पहले विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने कहा था कि बीजिंग एनएसजी में भारत के प्रवेश का विरोध नहीं कर रहा है. एनएसजी के सदस्य अब भी बंटे हुए हैं, ऐसे में नए देशों के प्रवेश के बारे में बात करना जल्दबाजी होगी.

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चीनी विदेश मंत्रालय ने सोमवार को कहा कि भारत की सदस्यता को लेकर चर्चा भारतीय विदेश सचिव एस जयशंकर की पिछले सप्ताह हुई चीन यात्रा के दौरान भी जारी रही थी, लेकिन चीन ने बता दिया है कि इस मुद्दे पर और चर्चा किए जाने की ज़रूरत है.

एस. जयशंकर ने विदेशमंत्री वान्ग यी से मुलाकात कर भारत को एनएसजी सदस्यता दिए जाने की वकालत की थी, लेकिन अब साफ है कि चीन सहमत नहीं हुआ.

48 देशों का समूह एनएसजी परमाणु तकनीक को नियंत्रित करता है, जिसकी भारत को अपनी बढ़ती ऊर्जा आवश्यकताओं के चलते ज़रूरत है.

इस ग्रुप का उद्देश्य परमाणु हथियारों के प्रसार को रोकना है, और इसका गठन भारत द्वारा वर्ष 1974 में किए गए पहले परमाणु परीक्षण की प्रतिक्रिया में किया गया था.

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विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता हुआ चुनयिंग ने कहा कि ग्रुप के सदस्यों के बीच न सिर्फ भारत की सदस्यता को लेकर, बल्कि सभी गैर-एनपीटी सदस्यों को शामिल किए जाने को लेकर विचार अलग-अलग हैं.

प्रवक्ता ने कहा कि एनपीटी ही परमाणु अप्रसार का आधार है, और चीन का मानना है कि इस मुद्दे पर विस्तृत चर्चा की ज़रूरत है.

उन्होंने कहा, “यह रवैया किसी खास देश के खिलाफ नहीं है.”

हुआ ने यह भी कहा कि नए सदस्यों को शामिल किए जाने का मुद्दा कभी भी एनएसजी की वार्षिक बैठक के एजेंडे पर नहीं रहा है, और इस बार भी यह एजेंडे पर नहीं.

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उन्होंने कहा, “गैर-एनपीटी सदस्यों को शामिल किया जाना कभी एनपीटी की बैठकों के एजेंडे में नहीं रहा है. इस साल सियोल में ऐसा कोई मुद्दा नहीं है.”
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