संसद और मुंबई पर हुआ 26/11 का आतंकी हमला सरकार प्रायोजित था

Mar 04, 2016

गृह मंत्रालय के पूर्व सेक्रेटरी आरवीएस मणि ने एसआईटी के एक वरिष्ठ अधिकारी के हवाले से यह दावा किया है कि संसद और मुंबई पर हुआ 26/11 का आतंकी हमला सरकार प्रायोजित था.

इशरत जहां केस में गुजरात हाईकोर्ट में दो हलफनामे दायर करने वाले गृह मंत्रालय के पूर्व अधिकारी आरवीएस मणि ने दावा किया था हत्याओं की जांच के लिए गठित की गई एसआईटी के एक सदस्य ने उन्हें बताया था कि 26/11 का मुबंई आंतकी हमला और 13 दिसंबर को संसद पर हुआ आतंकी हमला सत्ताधारी सरकार द्वारा करवाया गया था.

मणि जिन्होंने गृह मंत्रालय में अवर सचिव के रूप में 2009 शपथ-पत्र दायर किया था, ने तत्कालीन केंद्रीय शहरी विकास सचिव सुधीर कृष्णा को अदालत द्वारा नियुक्त एसआईटी के समक्ष 21 जून 2013 को अपने बयान के बारे में बताया था.

कृष्णा को दिए अपने बयान में मणि ने कहा था कि गुजरात के गांधीनगर में बयान दर्ज कराने के दौरान, एसआईटी के आईजी सतीश चंद्र वर्मा ने उनसे कई सवाल किए थे जो उनके गृह मंत्रालय के कार्यकाल के दौरान कभी सामने नहीं आ सके. मणि के मुताबिक एसआईटी के आईजी सतीश चंद्र वर्मा ने उनसे ऐसे कई सवाल किए, जिनका उनसे आधिकारिक संबंध नहीं था.

इसी दौरान वर्मा ने मणि से बताया कि 13 दिसंबर 2001 को संसद और 26/11 मुंबई में हुआ आतंकी हमला तत्कालीन सरकारों ने करवाया गया था. वर्मा के मुताबिक इसका मकसद आतंकवाद निरोधी कानून को मजबूत करना था.

वर्मा ने बताया था कि 13 दिसंबर के संसद हमले के बाद पोटा कानून आया था जबकि 26/11 के मुंबई हमले के बाद यूपीए द्वारा संशोधन किया गया.

मणि ने बताया कि मैंने वर्मा को बताया कि उन्हें अपनी राय रखने का हक है लेकिन इस तरह के विचार को आमतौर पर सुरक्षा तंत्र में आईएसआई की राय माना जाता है. मणि का दावा था कि वर्मा ने उन्हें कुछ कागजों पर यह जानते हुए भी हस्ताक्षर करने पर मजबूर किया कि यह मौजूदा समय में मेरे वरिष्ठों को गलत तरह से फंसाने के समान होगा.

उन्होंने कहा कि मैंने किसी भी बयान पर दस्तखत करने से इनकार कर दिया. मणि का कहना था कि उक्त संदर्भ में मेरा अनुरोध है कि भविष्य में मैं केवल सीवीओ या मंत्रालय के उनके अधिकृत प्रतिनिधियों की मौजूदगी में ही सीबीआई को बयान दर्ज कराऊंगा जबकि विषयवस्तु को गृह मंत्रालय ने भलीभांति परखा हो.

मणि ने दावा किया था कि वर्मा ने कुछ कागजातों पर उन्हें हस्ताक्षर करने को मजबूर किया था जो कागजात पूरी तरह से झूठे थे. दूसरी ओर वर्मा ने इन बातों से पूरी तरह से इंकार किया है.

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