संयुक्त राष्ट्र में पाकिस्तान ने फिर उठाया कश्मीर का मुद्दा

Jul 20, 2016

पाकिस्तान ने एक बार फिर संयुक्त राष्ट्र में कश्मीर का मुद्दा उठाते हुए हिज्बुल आतंकवादी बुरहान वानी की मौत के बाद घाटी में कथित मानवाधिकार उल्लंघनों पर चिंता जताई है.

पाकिस्तान ने संयुक्त राष्ट्र प्रमुख बान की मून और सुरक्षा परिषद के अध्यक्ष को लिखे पत्रों में कश्मीर में कथित मानवाधिकार उल्लंघनों पर ‘चिंता’ व्यक्त की.

संयुक्त राष्ट्र में पाकिस्तान की राजदूत मलीहा लोधी ने जुलाई के लिए सुरक्षा परिषद अध्यक्ष एवं जापानी राजदूत कोरो बेशो, बान के चीफ ऑफ स्टाफ एवं राजनीतिक मामलों के अवर महासचिव जेफरी फेल्टमैन को कश्मीर की स्थिति के बारे में बताते हुए कहा कि राज्य में मौलिक मानवाधिकारियों का ‘स्पष्ट उल्लंघन’ हो रहा है.

संयुक्त राष्ट्र में पाकिस्तान के मिशन की ओर से मंगलवार को जारी बयान में कहा गया कि मलीहा ने विदेश मामलों पर पाकिस्तानी प्रधानमंत्री के सलाहकार सरताज अजीज के लिखे पत्र भी संयुक्त राष्ट्र महासचिव एवं सुरक्षा परिषद के अध्यक्ष को सौंपे जिनमें कश्मीर में ‘चिंताजनक हालात पर पाकिस्तान की गंभीर चिंता’ व्यक्त की गई है और ‘कश्मीर में काबिज भारतीय बलों के कश्मीरियों के मौलिक मानवाधिकार के घोर उल्लंघन एवं निर्दोष नागरिकों की नृशंस हत्या की ओर ध्यान खींचा गया है’.

 

मलीहा लोधी ने संयुक्त राष्ट्र के अधिकारियों के साथ बैठकों में भी वानी के मारे जाने का मामला उठाया और इसे ‘कश्मीरी युवा नेता की हत्या’. करार दिया

उन्होंने एक बयान में कहा,‘आत्मनिर्णय के अधिकार के लिए विरोध कर रहे कश्मीरियों को ‘आतंकवादी’ करार देना सच्चाई का उपहास उड़ाना है और इससे भावनाएं और भड़क रही हैं’.

मलीहा ने यह भी ट्वीट किया था कि उन्होंने ‘सुरक्षा परिषद के अध्यक्ष को’ कश्मीर में ‘हालात’ के बारे में मंगलवार को जानकारी दी.

उन्होंने एक अन्य ट्वीट में कहा कि अजीज द्वारा संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के अध्यक्ष को लिखे गए पत्र को संयुक्त राष्ट्र के ‘एक आधिकारिक दस्तावेज के तौर पर प्रसारित किया जाएगा’.

बयान में कहा गया है कि मलीहा ने अपनी बैठकों में ‘जम्मू कश्मीर में काबिज भारतीय बलों द्वारा निर्देश लोगों के बर्बर दमन’ को समाप्त किए जाने की अपील की.

कश्मीर में ‘न्यायेतर हत्याओं’ की ‘स्वतंत्र एवं पारदर्शी’ जांच की अपील करते हुए मलीहा ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के कई प्रस्तावों के तहत जम्मू कश्मीर के लोगों के प्रति संयुक्त राष्ट्र की ‘पुरानी प्रतिबद्धताएं’ हैं.

पाकिस्तानी राजदूत को सूचित किया गया कि संयुक्त राष्ट्र महासचिव कश्मीर में हालात पर चिंतित हैं और यदि दोनों पड़ोसी देश उसकी मध्यस्थता स्वीकार कर लेते हैं, तो वह भारत एवं पाकिस्तान के बीच शांति वार्ताओं की मध्यस्थता के लिए तैयार हैं.

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