पाक, अलगाववादियों के साथ नेशनल कॉन्फ्रेंस ने कश्मीर पर सतत बातचीत की मांग की

Jul 25, 2016

जम्मू कश्मीर में मुख्य विपक्षी पार्टी नेशनल कॉन्फ्रेंस ने केन्द्र से राजनीतिक मुद्दों पर परस्पर स्वीकार्य समाधान के लिए पाकिस्तान के साथ-साथ जम्मू कश्मीर में अलगाववादी समूहों से सतत बातचीत शुरू करने को कहा है.

पार्टी ने यह भी कहा कि घाटी में मौजूदा अशांति को महज कानून व्यवस्था की समस्या के तौर पर लेना हास्यास्पद होगा.

स्थिति की समीक्षा के लिए शनिवार को पहुंचे गृह मंत्री राजनाथ सिंह को इस बारे में पूर्व मुख्यमंत्री एवं इसके कार्यकारी अध्यक्ष उमर अब्दुल्ला के नेतृत्व में नेशनल कॉन्फेंस के एक प्रतिनिधिमंडल ने सूचित कर दिया था.

गृह मंत्री को भेजे एक ज्ञापन में नेकां ने कश्मीर में समस्या को ‘राजनीतिक समस्या के तौर पर’ पहचानने में केंद्र की नाकामी पर गहरी निराशा जाहिर की, जहां आंतरिक और बाह्य दोनों स्तर पर राजनीतिक भागीदारी की जरूरत है.

पार्टी ने कहा कि ऐसी स्थिति से निपटने में राज्य सरकार की लगातार नाकामी ‘स्पष्ट और चौंकाने’ वाली है, घाटी में मौजूदा अशांति का विशुद्ध रूप से कानून व्यवस्था के मुद्दे के तौर पर सरलीकरण करना हास्यास्पद होगा.

कश्मीर में राजनीतिक भावनाओं से निपटने में ‘लीक से हटकर विचार करने के बजाय’ नयी दिल्ली की कोशिश और उनके जांचे परखे फॉर्मूले से हालात और बेकाबू हुए हैं और इससे लोगों में खासकर युवाओं में असंतोष और निराशा बढ़ी है जिनका दीर्घकालिक हित पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है.

प्रतिनिधिमंडल ने उम्मीद जताई कि केंद्र कश्मीर में राजनीतिक भावनाओं को स्वीकार नहीं करने के नतीजों पर विचार करेगा और पाकिस्तान के साथ सतत राजनीतिक वार्ता और अंदरूनी साझेदारों एवं घाटी में नेतृत्व के व्यापक प्रतिनिधित्व से सतत बातचीत शुरू करने के लिए तत्काल कदम उठाएगा.

उन्होंने कहा, ‘कश्मीर में बढ़ते राजनीतिक दुराव से निपटने में लगातार नाकामी भारत के लोगों के हितों के खिलाफ है.

घाटी में मौजूदा अशांति के दौरान लोगों की दुखदायी मौत पर पीड़ा, क्षोभ एवं दुख प्रकट करते हुए नेकां ने पीडीपी-भाजपा नीत राज्य सरकार की इस हृदय विदारक परिस्थिति से निपटने में स्पष्ट तौर पर असंवेदनशीलता एवं अक्षमता की निंदा की.

प्रतिनिधिमंडल में शामिल अली मोहम्मद सागर, अब्दुल रहीम राठेर और नसीर वानी ने उत्तर कश्मीर से सांसद एवं राज्य के वित्त मंत्री और पीडीपी के नेताओं के दावों की सत्यता की जांच सहित बुरहान वानी की मौत के बाद उपजी स्थिति से बेहद खराब तरीके से निपटने के मामले में न्यायिक जांच की मांग की.

वानी की मौत के बाद की स्थिति से निपटने के तरीकों को रेखांकित करते हुए नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेताओं ने कहा कि जब राजनीतिक और मानवीय आधार पर स्थिति से निपटने की जरूरत थी तब मंत्रियों एवं सत्ता पक्ष के निर्वाचित प्रतिनिधियों के विवादास्पद बयानों ने स्थिति को और जटिल बना दिया.

विपक्षी प्रतिनिधिमंडल ने आरोप लगाया, ‘जहां वरिष्ठ पीडीपी नेता और सांसद मुजफ्फर हुसैन बेग ने वानी की मौत के लिए राज्य पुलिस के निश्चित वर्ग के अंदर ‘आंतरिक प्रतिद्वंद्विता’ को जिम्मेदर ठहराया तो अन्य पीडीपी नेता और राज्य के वित्त मंत्री डॉ. हसीबी द्राबू ने कैबिनेट बैठक के दौरान बुरहान वानी की मौत को राज्य पुलिस द्वारा हिरासत में मौत का मामला बताया.’

नेशनल कॉन्फ्रेंस ने अखबारों के दफ्तरों और प्रिंटिंग प्रेसों पर कार्रवाई के लिए जिम्मेदारी तय करने के साथ न्यायिक जांच की मांग की और दावा किया कि अब मुख्यमंत्री इस दमनकारी कार्रवाई में उनकी सरकार की संलिप्तता से इनकार कर रही हैं.

बहरहाल, नेकां ने घाटी में प्रदर्शनकारियों पर पेलेट बंदूकों के अबाधित एवं अनियंत्रित इस्तेमाल से ‘आंशिक रूप से विकलांग हुए, घातक चोट खाए’ हजारों युवाओं और महिलाओं के उपचार के लिए तुरंत विशेषज्ञों को भेजने की उमर की अपील पर प्रधानमंत्री एवं गृहमंत्री के त्वरित कार्रवाई करने का आभार जताया.

उन्होंने गंभीर रूप से जख्मी हुए सभी नागरिकों के उपचार में हर संभव चिकित्सकीय एवं वित्तीय मदद और राज्य से बाहर विशेष उपचार कराए जाने की मांग की.

इसके अलावा उन्होंने गंभीर, जानलेवा और घातक चोट पैदा करने वाले ‘गैर घातक’ हथियारों पर पूर्ण रूप से प्रतिबंध लगाने की मांग की.

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