पाक को मानचित्र मुद्दे पर दखल देने का कोई अधिकार नहीं : भारत

May 18, 2016

भारत ने मानचित्र पर भारतीय मसौदा विधेयक पर पाकिस्तान की ओर से संयुक्त राष्ट्र के हस्तक्षेप की मांग करने पर यह कहते हुए तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की कि यह पूरी तरह आतंरिक विधायी मामला है और पाकिस्तान या किसी भी अन्य देश का इस पर दखल देने का कोई अधिकार नहीं बनता.

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता विकास स्वरूप ने कहा कि भारत उन विषयों पर अंतरराष्ट्रीय समुदाय को बीच में लाने की पाकिस्तान की बार-बार की कोशिश को दृढ़ता से नकारता है जिन्हें भारत द्विपक्षीय ढंग से हल करने के लिए हमेशा तैयार है.
स्वरूप ने भारत के भूस्थैतिक विधेयक पर पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय की प्रेस विज्ञप्ति पर एक सवाल के जवाब में कहा, ‘‘प्रस्तावित विधेयक पूरी तरह भारत का आतंरिक विधायी मामला है, क्योंकि पूरा जम्मू कश्मीर राज्य भारत का अभिन्न अंग है. पाकिस्तान या किसी अन्य देश का इस मामले पर दखल देने का कोई अधिकार नहीं बनता.’’
उन्होंने कहा, ‘‘सरकार उन विषयों पर अंतरराष्ट्रीय समुदाय को बीच में लाने की पाकिस्तान की बार-बार की बढ़ती कोशिश को दृढ़ता से नकारता है जिन्हें भारत द्विपक्षीय ढंग से हल करने के लिए हमेशा तैयार है.’’
इससे पहले इस्लामाबाद में पाकिस्तान विदेश मंत्रालय ने एक बयान जारी कर कहा कि पाकिस्तान ने कश्मीर के मानचित्र पर भारतीय संसद में मसौदा विधेयक को लेकर संयुक्त राष्ट्र के सामने अपनी चिंता प्रकट की है और उसने इस वैश्विक निकाय से अपने प्रस्तावों को बनाए रखने का आह्वान किया तथा वह भारत से ऐसे कार्यों से दूर रहने की अपील करता है जो अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन है.
पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने कहा, ‘‘पाकिस्तान ने भारतीय संसद में विवादास्पद भूस्थैतिक सूचना विनियमन विधेयक पेश करने की भारत सरकार की कोशिश के सिलसिले में न्यूयार्क में अपने स्थायी प्रतिनिधि के जरिए चिट्ठियों के माध्यम से संयुक्त राष्ट्र महासचिव और संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के अध्यक्ष के सामने चिंता प्रकट की है.’’
उसने कहा कि संयुक्त राष्ट्र सुक्षा परिषद के प्रस्तावों का उल्लंघन करते हुए भारत का आधिकारिक मानचित्र जम्मू कश्मीर को भारत के अंग के रूप में प्रदर्शित करता रहा है जो तथ्यात्मक रूप से अशुद्ध और कानूनी रूप से अमान्य है.
भूस्थैतिक सूचना विनियमन विधेयक के मसौदे के अनुसार भारत के मानचित्र का गलत निरूपण करने पर सात साल की जेल और 100 करोड़ रूपए तक का जुर्माना हो सकता है.
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