मायावती के करीब जाने वाले ओवैसी, अब क्यों चुभने लगे हैं उनकी आंख में

Oct 08, 2016
मायावती के करीब जाने वाले ओवैसी, अब क्यों चुभने लगे हैं उनकी आंख में
नई दिल्लीः  ओवैसी ने कभी बसपा से गठबंधन की बात कहकर मायावती से नजदीकियां बढ़ाईं। मगर मायावती को जब लगा कि ओवैसी कहीं दलित वोटों में सेंध न लगा दें, इस डर से मायावती ने गठबंधन का इरादा छोड़ दिया है।  बसपा से नाराज चल रहे दलित व अन्य बिरादरी के नेताओं को पटाने में जुट गए।इसकी कानोंकान खबर लगते ही मायावती की नींद उड़ गई। वजह कि मायावती को अब लगने लगा कि जिस ओवैसी से वे  गठबंधन करने की तैयारी में थीं वे तो उनकी ही जड़ खोदने में जुट गए। इस पर मायावती ने पार्टी के बड़े नेताओं को संदेश दिया है कि वे किसी भी कीमत पर अपने वोटबैंक को बिखरने न दें।
इस फार्मूले पर चल रहे ओवैसी
ओवैसी का मानना है कि यूपी में 21 प्रतिशत दलित और 19 प्रतिशत मुस्लिम अगर मिल जाएं तो सत्ता की चाबी इन्हीं दो वर्गों के पास रहेगी। मायावती से बीच में नजदीकियां इसी उद्देश्य से ओवैसी बढ़ाते रहे। शुरुआत में मायावती को भी लगा कि ओवैसी की  पार्टी से गठबंधन से हो सकता है कि बसपा को लाभ मिले। सपा के पाले में गए मुस्लिम मतों को अपने पास बुलाया जा सके। मगर बाद में जब मायावती को लगा कि इस गठबंधन से बसपा को कम, बल्कि ओवैसी को ज्यादा फायदा पहुंचेगा। क्योंकि राजनैतिक इतिहास गवाह है कि बड़ी पार्टियों के साथ गठबंधन के दम पर हमेशा छोटे दल ही स्थापित हुए हैं, जबकि गठबंधन से बडे़ दलों को नुकसान पहुंचा है। यूपी में कांग्रेस और बसपा खुद बड़े दलों की संगत कर सूबे मे बड़ी पार्टियों के रूप में स्थापित होने में सफल रहीं। जब ओवैसी की पार्टी के नेता प्रदेश अध्यक्ष शौकत अली के निर्देशन में दलित-मुस्लिम फार्मूले को धार देने में जुटे तो मायावती को लगा कि कहीं उनका वोट बैंक दरकने न लगे। यहां बता दें कि मित्रसेन यादव के निधन के बाद हुए उपचुनाव में ओवैसी ने बीकापुर सीट से दलित प्रदीप कोरी को उतारा था। पहली बार किसी सीट पर लड़े चुनाव में ओवेसी की पार्टी को करीब 12 हजार वोट मिले। जिससे ओवैसी को बाद में अपना यह फार्मूला हिट होने की उम्मीद है।
सवा सौ मुस्लिम प्रत्याशी खुद उतार रहीं मायावती
बसपा मुखिया दलित और मुस्लिमों के दम पर इस बार सत्ता में आने का ख्वाब संजो रहीं हैं। यही वजह है कि पार्टी से इस बार सवा सौ से ज्यादा मुस्लिम प्रत्याशियों को उतार रहीं हैं। उन्हीं सीटों पर मुस्लिम प्रत्याशी उतारे जा रहे हैं, जहां मुस्लिम वोट काफी संख्या में हैं। ऐसे में ओवैसी से गठबंधन के चलते कुछ मुस्लिम सीटों को समझौते में ओवैसी की पार्टी को देना पड़ेगा। दूसरी खास बात है कि यूपी के मुस्लिम अब भी सबसे ज्यादा सपा से जुड़े हैं, वहीं कुछ बीएसपी के साथ। ओवैसी का यूपी में कोई जनाधार भी नहीं है। बिहार चुनाव में कुछ सीटों पर उतरकर ओवैसी अपना हाल देख चुके हैं। ऐसे में यूपी का मुसलमान सोचता है कि ओवैसी के साथ जाने पर कहीं उसका वोट खराब न हो जाए। इसी के कारण यूपी के मुसलमान सपा या बसपा के साथ हवा का रुख देखकर समर्थन देने का इरादा तैयार करते हैं। क्योंकि उनका मुख्य उद्देश्य भाजपा को सत्ता से आने से रोकने का रहता है।
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