उप्र : स्कूली बैग और ड्रेस के रंगों में उलझी योगी सरकार

Apr 27, 2017
उप्र : स्कूली बैग और ड्रेस के रंगों में उलझी योगी सरकार

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ उत्तर प्रदेश में सब कुछ बदलना चाहते हैं। इसी कड़ी में उन्होंने प्राथमिक स्कूलों के छा़त्रों का ड्रेस बदलने का निर्णय लिया है। लेकिन इस ड्रेस का रंग क्या हो इसे लेकर सरकार उलझी हुई है।

अब तक इस ड्रेस का रंग फाइनल नहीं हो पाया है। जबकि बैग का डिजायन फाइनल कर दिया गया है। इसके अलावा योगी ने इस बार स्कूली बच्चों को जूते भी देने का निर्णय लिया है।

प्रदेश के प्राथमिक स्कूलों के छात्रों को किताबें, कॉपियों के साथ ड्रेस, बैग कई सालों से दिया जा रहा है। वर्तमान में इन स्कूलों का ड्रेस खाकी रंग का है। इन बच्चों को पैरों में पहनने के लिए कुछ नहीं दिया जाता। जिससे वह आम तौर पर चप्पल आदि पहन कर ही स्कूल आते हंै। योगी ने इस पर चिंता जताते हुए कहा, “चप्पल में बच्चे अच्छे नहीं लगते, इसलिए इन्हें जूता भी दिया जाए।”

इसके अलावा उन्होंने खाकी ड्रेस को भी बदलने पर जोर दिया है। इस तरह इन स्कूलों के बच्चांे का लिबास पूरी तरह से बदलने की तैयारी योगी सरकार द्वारा कर ली गई है।

इन बच्चों के लिए जूते, स्कूली बैग को अंतिम रूप दे दिया गया है। जूते सैंथेटिक लेदर के होंगे, जिसमें पालिस करने की जरूरत नहीं होगी। यह पानी में खराब भी जल्दी नहीं होंगे।

इसी तरह स्कूली बैग में इस बार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एवं मुख्यमंत्री योगी की फोटो प्रकाशित की जाएगी। जबकि पूर्व में अखिलेश यादव की तस्वीर हुआ करती थी। वहीं अखिलेश सरकार ने इन बच्चों को दोपहर का खाना खाने के लिए बाकायदा थाली एवं गिलास भी वितरित किए थे। इस पर सरकार चुप्पी साधे हुए है।

योगी इन दिनों हर विभाग का अलग अलग निरीक्षण कर रहे हंै। प्राथमिक शिक्षा विभाग के निरीक्षण के दौरान उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने इन स्कूलों के बच्चों के ड्रेस का रंग बदलने की सिफारिश की थी। इसके साथ ही एक मंत्री ने कमल के रंग की ड्रेस बानने की सलाह दी थी।

विभागीय अधिकारियों ने इस दौरान केंद्रीय, नवोदय विद्यालयों सहित कई स्कूलों के ड्रेस मुख्यमंत्री को दिखाए। लेकिन इस पर अब तक आम सहमति नहीं बन पाई है कि विद्यार्थियों की ड्रेस किस रंग की होनी चाहिए।

मालूम हो कि प्रदेश में एक लाख 41 हजार प्राथमिक विद्यालय हैं। जिसमें एक लाख 9 हजार ग्रामीण क्षेत्रों में चल रहे हैं। इन स्कूलों में करीब 24 लाख बच्चे पढ़ाई कर रहे हैं। इसके अलावा इन स्कूलों मंे योग की कक्षाएं भी इस बार आरंभ करने पर सरकार विचार कर रही है।

पाठयक्रमों में भी योग को शामिल करने पर विचार किया जा रहा है। ऐसे में योगी सरकार द्वारा उप्र में चल रही बदलाव की बयार से देश का भविष्य कहे जाने वाले प्राथमिक स्कूलों के छात्रों को लेकर असमंजस बरकरार है कि वह क्या पढेंगे और किस रंग की पोषाक पहनेंगे? जबकि इन स्कूलों में नया सत्र आरंभ हो चुका है। ऐसे में बच्चों के पास न तो किताबें हैं और न ही पाठयक्रमों का पता।

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