विपक्षी दलों ने देश में सूखे के मुद्दे को जोर-शोर से उठाने की तैयारी की

Apr 23, 2016

विपक्षी दलों ने सोमवार से शुरू होने वाले संसद के बजट सत्र के दूसरे हिस्से में देश में सूखे के मुद्दे को जोर-शोर से उठाने की तैयारी की है तथा कई सदस्यों ने इस पर चर्चा के लिए पहले ही नोटिस दे दिये हैं.

विपक्षी दल सूखे पर सरकार पर निशाना साधते हुए उस पर समस्या पर ”आंखें मूंदने” का आरोप लगाते रहे हैं. विपक्षी दल साथ ही सरकार पर इस पर इसके कारण देश में जलसंकट पर चर्चा के लिए एक सर्वदलीय बैठक बुलाने के लिए कहते रहे हैं.

राज्यसभा में विपक्ष के नेता एवं वरिष्ठ कांग्रेसी नेता गुलाम नबी आजाद और उनकी पार्टी के सहयोगियों आनंद शर्मा, हुसैन दलवई, भुवनेश्वर कलिता, रजनी पाटिल, विप्लव ठाकुर, मोहम्मद अली खान, ए यू सिंह देव (बीजद), के सी त्यागी (जदयू), सतीश चंद्र मिश्र (बसपा), निर्दलीय सदस्य राजीव चंद्रशेखर एवं मनोनीत सदस्य के टी एस तुलसी इस संबंध में राज्यसभा सभापति हामिद अंसारी को पहले ही नोटिस दे चुके हैं जिसे स्वीकार कर लिया गया है.

नोटिस में ”वर्तमान सूखे से उत्पन्न होने वाली गंभीर स्थिति, गर्म हवाओं और उसके परिणामस्वरूप देश में जलसंकट तथा इस संबंध में सरकार की ओर किये गए उपायों” पर चर्चा की बात कही गई है.

नोटिस को प्रक्रिया एवं कार्य संचालन नियम 177 के तहत स्वीकार किया गया है और इस मुद्दे पर 27 अप्रैल को चर्चा होगी.

भाकपा ने दावा किया है कि केंद्र के पास सूखे से निपटने के लिए कोई ”गंभीर” योजना नहीं है. भाकपा ने कहा है कि सरकार को आपदा पर चर्चा करने और उससे निपटने के तरीके खोजने के लिए एक सर्वदलीय बैठक आहूत करनी चाहिए.

कांग्रेस ने मांग की है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को स्थिति से युद्धस्तर पर निपटने के लिए सूखा प्रभावित राज्यों के मुख्यमंत्रियों की एक बैठक बुलानी चाहिए.

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने हाल में केंद्र पर सूखा प्रभावित बुंदेलखंड पर आंखें मूंदने का आरोप लगाया था.

सूखा और उससे उत्पन्न जल संकट मुद्दे को लेकर सरकार की आलोचना के बीच ग्रामीण विकास मंत्री बिरेंद्र सिंह ने कहा है कि राज्यों में 1500 करोड़ रूपये केंद्रीय राशि बिना खर्च हुए बची हुई है. इसका इस्तेमाल सूखा प्रभावित क्षेत्र में पेयजल संकट को कम करने के लिए किया जा सकता है.

सिंह ने कहा है कि उन्होंने पहले ही राज्यों से कहा है कि वे प्राकृतिक आपदा जैसी समस्याओं को कम करने के लिए उनके पास पड़े लचीला कोष में से 10 प्रतिशत राशि का इस्तेमाल कर सकते हैं.

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