एक शख्स जिसको 67 साल की लम्बी लड़ाई के बाद भी इन्साफ नहीं मिला, इसे ज़्यादा अफ़सोस क्या होगा, शहज़ाद आलम बरनी

Jul 21, 2016

अलीगढ़ । बाबरी मस्जिद विध्वंस केस के मुख्य पक्षधार हाशिम अंसारी 96 साल की तवील ज़िन्दगी के बाद इंतेक़ाल फरमा गए । हाशिम अंसारी की पहचान सच्चाई के एक सिपाही की तरह रही और हमेशा वो सच्चाई की जंग के लिए जाने जायेंगे । हाशिम अंसारी के इंतेक़ाल पर समाजवादी पार्टी के युवा नेता शहज़ाद आलम बरनी ने खेद व्यक्त किया और हिंदुस्तान की कानून व्यवस्था पर कड़े सवाल उठाये ।

शहज़ाद आलम बरनी ने अपनी एक विज्ञप्ति में कहा कि हिंदुस्तान में अब कानून की किसी किताब या न्यायालयों की कोई ज़रुरत नहीं है ।उन्होंने कहा कि एक शख्स 67 साल की लम्बी लड़ाई के बाद भी इन्साफ नहीं पा सका इसे ज़्यादा अफ़सोस कि कोई बात नहीं हो सकती । 67 साल के लम्बे आरसे के बावजूद न्यायालय हाशिम अंसारी के जीवित रहते एक मुक़दमे पर फैसला नहीं कर सका, अगर यही इन्साफ का तरीका है तो अब हिंदुस्तान में किसी भी कानून की किताब की कोई ज़रुरत नहीं है ।

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मालूम रहे कि हाशिम अंसारी ने 1949 में बाबरी मस्जिद के केस की लड़ाई लड़नी शुरू की थी और 1992 में बाबरी मस्जिद को शहीद कर दिया गया! लेकिन अंसारी से हिम्मत नहीं हारी और वो आखरी साँस तक लड़ाई लड़ते रहे ।

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