बुजुर्ग ससुर गर्भवती बहू को बचाने के लिए गोद में उठा कर दौड़ता रहा

Sep 09, 2016
बुजुर्ग ससुर गर्भवती बहू को बचाने के लिए गोद में उठा कर दौड़ता रहा

ओडिशा के कालाहांडी से पत्नी को कंधे पर लेकर भागते एक पति की तस्वीर सामने आई थी, तो इस घटना ने देश को झकझोर कर रख दिया था। लोगों की संवेदनहीनता को लेकर काफी सारे सवाल उठे थे। उसके बाद कानपुर में एक पिता की तस्वीर भी सामने आई, जिसमें पिता अपने 12 साल के मासूम के इलाज के गोद में उठाकर अस्पताल का चक्कर काटता रहा। डॉक्टरों की संवेदनहीनता का यह मामला अभी ठंडा भी नहीं हुआ था कि मिर्जापुर से ऐसी ही एक और तस्वीर सामने आ गई। डॉक्टरों की संवेदनहीनता के कारण एक और महिला की जान चली गई और अस्पताल प्रशासन अब जांच की बात कर रहा है।
मिर्जापुर जिला अस्पताल में एक महिला के इलाज के लिए उसका ससुर अस्पताल का चक्कर काटता रहा, मगर डॉक्टरों ने उसकी सुध नहीं ली। महिला को लेकर उसका ससुर इधर से उधर घूमता रहा, पर धरती के भगवान कहे जाने वाले इन डॉक्टरों का दिल नहीं पसीजा। इलाज के अभाव में महिला ने दम तोड़ दिया। यूपी के सरकारी अस्पताल की यह तस्वीर मानवता को भी शर्मसार करने वाली है। एक ससुर अपनी गर्भवती बहू को बचाने के लिए गोद में उठा कर जिला अस्पताल में दौड़ रहा है मगर कोई भी सुनने वाला नहीं है। इमरजेंसी में तैनात डॉक्टरों ने जब मना किया तो बूढ़े ससुर ने प्राइवेट अस्पताल का रूख किया, जहां से फिर उसे जिला अस्पताल भेज दिया गया। इस भागदौड़ के क्रम में महिला की मौत हो गई।
ससुर का आरोप है कि अस्पताल और डॉक्टरों की लापरवाही ने बच्चे और एक मां की जान ले ली। वीडियो रविवार रात का है, आज जब इस मामले का वीडियो सामने आया तो स्वास्थ महकमे में हड़कंप मच गया। दरअसल रविवार को 108 एम्बुलेंस ने अंशु पाण्डेय निवासिनी गेरुआ गांव को जिला महिला अस्पताल पहुचाया । मरीज को एमरजेंसी में पहुंचाने के 5 घंटे तक कोई डॉक्टर देखने नहीं आयी । वहां मौजूद नर्स ने गर्भवती महिला को ड्रिप लगा दिया।

3 बजे से लेकर जब सुबह 8 बजे तक इस इमरजेंसी वार्ड में कोई डॉक्टर नहीं आयी तो बहु को तड़पता देख ससुर से रहा न गया आनन फानन में मजबूरन इन्हें प्राइवेट डॉक्टर को दिखाना पड़ा, जहां महिला की गंभीर स्थिति को देखते हुए डॉ ने वापस जिला अस्पताल भेज दिया । वापस अस्पताल में स्ट्रेचर नहीं मिलने पर वह बुजुर्ग ससुर अपनी गोद में बहु को लेकर इमरजेंसी वार्ड की ओर दौड़ लगाता पहुंचा।
जब महिला का इलाज शुरू हुआ को बच्चे की मौत हो चुकी थी और बाद में इन्फेक्शन फ़ैल जाने के कारण महिला की हालत गंभीर हो गयी उसे वाराणसी के लिए रेफर कर दिया गया जहां उसकी मौत हो गयी। अब घर वालों का आरोप है सही समय से इलाज मिलता तो दोनों बच जाते । महिला के ससुर कपूर चंद पांडे का कहना है कि डाक्टरों की लापरवाही से मेरे बहू की मौत हुई है।
वही इस मामले में अस्पताल प्रशासन मामले की जांच की बात कर कार्रवाई की बात कर रहा है। मगर सवाल यह भी उठता है कि कब तक इस लाचार सिस्टम के आगे लोगों की जान जाती रहेगी, आखिर इन मौतों के लिए जिम्मेवार लोगों के प्रति कार्रवाई कब होगी।

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