महाराष्ट्र सरकार के टॉप अफसर की असंवेदनशीलता ने ली एक बेटे की जान

Aug 20, 2016
महाराष्ट्र सरकार के टॉप अफसर की असंवेदनशीलता ने ली एक बेटे की जान

। सरकार के एग्रीकल्चर डिपार्टमेंट के एक सीनियर अधिकारी की असंवेदनशीलता की वजह से जूनियर अधिकारी को अपना बेटा खोना पड़ा। एग्रीकल्चर डिपार्टमेंट में एडिशनल चीफ सेक्रेटरी भगवान सहाय ने अपने मातहत अधिकारी राजेंद्र घाडगे को घर जाने की छुट्टी नहीं दी जिस वजह से डिप्रेशन के शिकार उनके बेटे ने खुदकुशी कर ली।

इस मामले पर जब हंगामा खड़ा हुआ तब सरकार ने सहाय को जिम्मेदारियों से मुक्त कर डिपार्टमेंट से फिलहाल हटा दिया है और उनके खिलाफ जांच के आदेश दिए हैं।

‘पापा जल्दी घर पहुंचो, वरना कर लूंगा’

इस मामले में पीड़ित एग्रीकल्चर डिपार्टमेंट के ज्वाइंट सेक्रेटरी राजेश घाडगे का कहना है कि 12 अगस्त की दोपहर में उनके बेटे का फोन आया जो डिप्रेशन का शिकार था। बेटे ने कहा कि जल्दी घर पहुंचो वरना सुसाइड कर लूंगा।

पापा घर नहीं पहुंचे तो कर लिया सुसाइड

घाडगे ने अपने सीनियर अधिकारी भगवान सहाय से घर जल्दी जाने के लिए हाफ डे लीव मांगा लेकिन सहाय ने इंकार कर दिया और फुल डे काम करने को कहा। इसके बाद घाडगे के पास उनके बेटे का दोबारा फोन आया। उन्होंने फिर सहाय से घर जाने देने की गुहार लगाई लेकिन सहाय ने छुट्टी नहीं दी। घाडगे जब तक घर पहुंचे तब तक उनका बेटा आत्महत्या कर चुका था।

मामले की तरफ सीएम और एग्रीकल्चर मिनिस्टर का गया ध्यान

इस घटना के बाद एग्रीकल्चर डिपार्टमेंट में हंगामा खड़ा हो गया। एडिशनल चीफ सेक्रेटरी के खिलाफ कर्मचारी गोलबंद होकर उनको डिपार्टमेंट से हटाने और घटना की जांच की मांग करने लगे। हंगामा इतना बड़ा हुआ कि इस मामले में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडनवीस और एग्रीकल्चर मिनिस्टर पांडुरंग फुंडकर को हस्तक्षेप करना पड़ा।

घटना के बाद आरोपी अफसर के खिलाफ कार्रवाई

एग्रीकल्चल मिनिस्टर ने एडिशनल चीफ सेक्रेटरी भगवान सहाय के खिलाफ डिपार्टमेंटल जांच के आदेश दिए हैं। उनको पद की जिम्मेदारियों से मुक्त कर जांच पूरी होने तक डिपार्टमेंट से हटा दिया गया है। भगवान सहाय के पद की सारी जिम्मेदारी फाइनांस के एडिशनल चीफ सेक्रेटरी डीके जैन को सौंप दी गई है।

 

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