बिहार में इंटर टॉपर्स घोटाले के बाद सामने आया बीएड घोटाला, जानिए पूरा मामला

Jun 11, 2016

पटना (मुकुन्द सिंह)। शिक्षा विभाग और शिक्षा माफिया ने मिलकर बिहार मे चल रहे शिक्षा व्यवस्था की किरकिरी इसतरह कर दी है कि पूरे देश में बिहार का नाम खराब हो गया है। सूबे में इंटर टॉपर्स घोटाले का मामला अभी खत्म नहीं हुआ है की अब एक और घोटाला सामने आ गया है। जी हां बीएड घोटाला। यह कारनामा भी किसी और कॉलेज का नहीं बल्कि बीआर कॉलेज भगवानपुर का ही है। विशुन राय कॉलेज द्वारा राजदेव राय बीएड डिग्री कॉलेज की संबद्धता वीआरए विश्व विद्यालय से प्राप्त की गई है। इस कॉलेज के विद्यार्थी भी सूबे में टॉप कर रहे हैं। टॉप टेन में इसी कॉलेज के छात्र आते हैं। जहां का रिजल्ट 96 प्रतिशत से अधिक है। वहीं आपको बताते चलें की इस कॉलेज के 2013 से 14 और 2014 से 15 के बीएड के रिजल्ट चौकाने वाला हैं। इन दोनों बर्षो का रिजल्ट जहां 96 फीसदी से अधिक है। वहीं वर्ष 2014 से 15 में सिर्फ तीन छात्र फेल हुए हैं तो 4 छात्रों का रिजल्ट पेंडिंग है जबकि इनकी थ्योरी का नंबर 50 से 60% का है। तो वर्ष 2013 -14 सत्र में भी 88 से अधिक छात्र प्रथम श्रेणी से उत्तीर्ण हुए हैं।

अंगूठाछाप चला रहा है बीएड कॉलेज

जी हां ये सुनकर आपको आश्चर्य होगा कि यह अंगूठा छाप व्यक्ति कैसे बीएड कॉलेज चला रहा है। तो हम आपको बताते चलें कि जिस राजदेव राय के नाम पर बीएड डिग्री कॉलेज है वह अंगूठाछाप है। सफेद कपडा पुरानी राजदूत बाइक इनकी पहचान है। सुबह-शाम साग सब्जियों के खेत में मजदूरों के पीछे खड़े होकर बात करने वाले राजदेव राय टॉपर्स घोटाले के बाद से भूमिगत हो चूके हैं।

ताकत और तिकड़मबाजी से बोर्ड के फैसले पर लगाया था रोक

बिहार बोर्ड में जितनी पकड़ प्रिंसपल अमित कुमार की थी उससे अधिक पकड़ उसकी बिहार विश्वविद्यालय में भी थी। जिसकी वजह से जैसा चाहा वैसा परिणाम उसे मिलता था। वर्ष 2011 में राजदेव राय डिग्री कॉलेज का स्नातक का परीक्षा केंद्र जमुनी लाल महाविद्यालय में पड़ा तो परीक्षार्थियों ने नकल करने के लिए तोड़ फोड़ करते हुए धमाल मचाया था। वहीं जब यह मामला विश्वविद्यालय के परीक्षा बोर्ड के सामने आया तो उस समय डॉ रवि वर्मा कुलपति और परीक्षा नियंत्रक अरुण कुमार सिंह ने बोर्ड कॉलेज की स्नातक परीक्षाओं को अगले 5 साल तक विश्वविद्यालय मुख्यालय में कराने का फैसला दिया था।

लेकिन अमित कुमार ने अपनी ताकत और तिकड़मबाजी से इसे रोक लगाते हुए फैसले को वापस लेकर पूर्ववत: आदेश जारी करा दिया था। यह आदेश कुछ ही महीनों के भीतर छात्रों की परेशानी का हवाला देकर बोर्ड ने जारी कर दिया था। बिहार विश्वविद्यालय द्वारा 3 महीने पूर्व ही विशुन राय टीचर्स ट्रेनिंग कॉलेज की मानता दी गई थी। टॉपर्स घोटाले के प्रकाश में आते ही विश्वविद्यालय ने इसकी मान्यता को रद्द कर दिया है

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