नोटबंदी के चलते मज़दूर मंदिरों और गुरुद्वारों में खाना खाने को मजबूर

Nov 22, 2016
नोटबंदी के चलते मज़दूर मंदिरों और गुरुद्वारों में खाना खाने को मजबूर

जबसे केंद्र सरकार ने 500,1000 के नोटों पर प्रतिबंध लगाया है। तभी से हर तरफ पैसे की कमी दिखाई दे रही है। जिसमे सबसे ज्यादा परेशान मजदूर तबका है। गुडगाँव का 35 वर्षीय विजेंद्र कुमार का कहना है की जबसे सरकार ने 500 और 1000 रुपये के नोट बंद किये है तबसे काम मिलने में बड़ी दिक्कते आ रही है। कुमार का कहना है गुडगाँव के सीधेश्वर मंदिर जो की मज़दूर चौक नाम से मशहूर है वही सारे मज़दूर इख्ठ्ठा होते है। लेकिन पिछले सप्ताह से मैं कुछ नहीं कमा पाया हूं। उसकी सहमति में बाकि सभी मज़दूर भी गर्दन हिला देते हैं। मज़दूर चौक पर काम करने वाले मज़दूरों ने बताया कि 500,1000 के नोट अब रद्दी हो चुके है लेकिन फिर भी बहुत से कॉन्ट्रैक्टर्स मज़दूरों को लेने आते हैं तो उन नोटों को ठिकाने लगाने के लिए हमे वही नोट वेतन के तौर पर देते हैं।

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कुमार का कहना है की हम में से बहुत से मज़दूरों के बैंक में खाते भी नहीं है और आईडी प्रूफ भी नहीं है इस कारण हम लोग नोट बदल भी नहीं पाते। मज़दूर चौक पर खड़े एक व्यक्ति ने बताया कि पहले 50 मज़दूरों में से 30 को काम मिल जाया करता था।लेकिन नोटबंदी के कारण अब 10-15 मज़दूरों को ही सिर्फ काम मिल पाता है। मज़दूरों के समूह में से हामिद ने बताया कि हम लोग पैसे ना होने के कारण पिछले कुछ दिनों से मंदिरों और गुरुद्वारों में खाने पर मजबूर है।

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