नोटबंदी का असर: पाकिस्तानी हिन्दू मुश्किल में, भूखे मरने को मजबूर प्रवासी

Nov 23, 2016
नोटबंदी का असर: पाकिस्तानी हिन्दू मुश्किल में, भूखे मरने को मजबूर प्रवासी

नोट बंदी से केवल देश की जनता ही नहीं परेशान है। पाकिस्तान से आये प्रवासी भी मुश्किलों के हालात का सामना करने को मजबूर है। इन लोगो के सामने भूखे मरने के नौबत आ चुकी है। दरअसल मजदूरी करने के बाद इनके पास जो रकम इकठ्ठा हुई थी वो 500 और 1000 के नोट में है। और नोट बंदी के फैसले के बाद से कोई इनकी मदद नहीं कर रहा है। हालांकि सरकार ने पुराने नोट को बदलने के लिए 50 दिन का समय दिया हुआ है लेकिन फिर भी 500 और 1000 के नोट नहीं बदल पा रहे है। सरकार ने नियम जारी किया था कि पुराने नोट वही जमा या बदलवा सकते है जिनके पास बैंक अकाउंट हो या तो कोई पहचान पत्र।

असल में पाकिस्तान से आये हिन्दुओ के पास न तो कोई पहचान पत्र है। और न ही उनके पास कोई बैंक अकाउंट है। इसलिए इन लोगो के सभी रास्ते अब बंद होते दिख रहे है। स्थानीय लोग भी इनकी मदद नही कर रहे है। जैसलमेर में रह रहे प्रवासी हिन्दू राज बहादुर और किशन चंद ने बताया की हमारे पास जितने भी 500 और 1000 के नोट थे उनको बदलने के लिए हमारे पास कोई उपाय नही है। राज बहादुर ने कहा की हम भूखे मरने के करीब है। पहले कुछ दुकानदारों ने हमें उधार भी दिया लेकिन अब उन्होंने भी हाथ खड़े कर लिए है। हम कहाँ जाये, हम अपने बच्चो का पालन पोषण कैसे करे, हमारे सामने यह सबसे बड़ा सवाल है। हम केंद्र सरकार से हमारी मदद करने की गुहार लगाते है। या तो वो हमारी मांग सुने जो हमेशा हिन्दुओ के ऊपर अपनी राजनीती चमकाने में लगे रहते है। देखना है इनकी आवाज उन लोगो तक कब पहुँचती है।

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