लड़ाई नहीं, हल चाहिए : सोशलिस्ट पार्टी और रिहाई मंच का धरना

Sep 24, 2016
लड़ाई नहीं, हल चाहिए : सोशलिस्ट पार्टी और रिहाई मंच का धरना

उरी हमले के बाद से देश में जो माहौल बना हुआ है उससे ऐसा लग है कि सरकार देश को युद्ध में झोंकने की तैयारी कर रही है। सरकार को युद्ध से फायदा हो सकता है लेकिन कोई भी लड़ाई आम जनता के हित में नहीं होती।

जो लोग युद्ध की बात कर रहे हैं उनसे पूछा जाना चाहिए कि क्या वे दोनों देशों में कई शहरों को हिरोशिमा-नागासाकी में तब्दील होते देखना चाहते हैं. लड़ाई की वजह कश्मीर समस्या का हल निकालने की जरूरत है ताकि भविष्य में न तो कोई भारतीय सैनिक शहीद हो और न ही कश्मीर का कोई नागरिक।

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नरेन्द्र मोदी की सरकार को आए अभी दो वर्ष ही हुए हैं और भारत पर दो आतंकी हमले हो चुके। जम्मू व कश्मीर में भाजपा की गठबंधन सरकार है और आजादी के बाद से जम्मू व कश्मीर में सबसे खराब हालात हैं। आखिर क्या बात है कि भाजपा की सरकार आने के बाद से कश्मीर के अंदर और भारत की सीमा पर स्थिति ज्यादा तनावपूर्ण हो गई। इसमें कहीं भारतीय जनता पार्टी के नजरिए व उनके तरीके का दोष तो नहीं? इस पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के लोगों को आत्मचिंतन करने की जरूरत है।
हम मांग करते हैं कि सरकार युद्ध की बात करना बंद कर कशमीर की समस्या का स्थाई हल ढूढ़ने की दिशा में पहल करे। तब तक के लिए अपनी सुरक्षा का पुख्ता इंतजाम करे ताकि देश में बार-बार घुसपैठ न हो।

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हमें लड़ाई नहीं हल हिए इस बात को लेकर 23 सितम्बर, 2016, शुक्रवार को गांधी प्रतिमा, हजरतगंज, लखनऊ पर शाम साढ़े चार से छह बजे तक एक प्रदर्शन का आयोजन किया गया। इसमें संदीप पाण्डेय, प्रो0 रमेश दिक्षित, अमित अम्बेडकर, शकील कुरैशी, राजीव यादव, अनिल यादव, किरन सिंह, अतहर हुसैन, केके वत्स अन्य सभी मौजूद थे।

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