विवादित ईशनिंदा कानून में कोई बदलाव नहीं: पाकिस्तान सरकार

Mar 31, 2016

पाकिस्तान सरकार ने पिछले चार दिन से इस्लामी प्रदर्शनकारियों के साथ चल रहे गतिरोध को समाप्त करने के लिए बुधवार को वादा किया कि वह देश के विवादित ईशनिंदा कानून में कोई बदलाव नहीं करेगी.

पंजाब के उदारवादी गवर्नर सलमान तासीर की हत्या के जुर्म में फांसी पर लटकाए गए मुमताज कादरी को ”शहीद” घोषित करने की मांग को लेकर हजारों की संख्या में इस्लामी प्रदर्शनकारी पिछले चार दिन से राजधानी में डेरा डाला हुये है.

सरकारी ‘पीटीवी’ की खबर के अनुसार, प्रदर्शनकारियों के नेताओं ने सरकारी प्रतिनिधियों से बातचीत की जो ”सफल” रही और बिना किसी खूर-खराबे तथा हिंसा के प्रदर्शन शांतिपूर्ण तरीके से समाप्त करने का रास्ता निकाला.

अधिकारियों और प्रदर्शनकारियों के बीच हुए सात सूत्री समझौते के अनुसार, सरकार ने प्रदर्शनकारियों से वादा किया कि वह ईशनिंदा कानून में कोई संशोधान नहीं करेगी. यह मुमताज कादरी के समर्थकों की मुख्य मांग थी.

ईशनिंदा कानून में संशोधन की मांग करने वाले तासीर की हत्या के पांच साल बाद इस वर्ष फरवरी में कादरी को फांसी दी गयी.

इस्लामाबाद के रेड जोन में पिछले चार दिनों से जारी गतिरोध के दौरान गिरफ्तार किए गए सैकड़ों ”निर्दोष” लोगों को छोड़ने पर भी सरकार राजी हुई.

सरकार ने ईशनिंदा कानून के तहत दोषी करार दिए गए लोगों के प्रति बिल्कुल नरमी नहीं दिखाने का भी वादा किया.

हालांकि प्रदर्शनकारियों की एक और मुख्यमांग, कादरी को ”शहीद” घोषित करने और 2010 में ईशनिंदा कानून के तहत दोषी पाये जाने पर एक अदालत द्वारा मौत की सजा पाने वाली ईसाई महिला आसिया बीबी को फांसी देने पर सरकार ने कोई आश्वासन नहीं दिया.

तासीर के सुरक्षा गार्ड कादरी ने उनकी हत्या कर दी थी. तासीर 2011 में आसिया से मिलने जेल गए थे, उन्होंने महिला के लिए समर्थन की बात कही थी और राष्ट्रपति से क्षमादान का वादा भी किया था.

देश में शरीया घोषित करने की एक अन्य मांग को लेकर यह तय किया गया है धर्मगुरू इस संबंध में विस्तृत प्रस्ताव धार्मिक मामलों के मंत्रालय को सौंपेंगे.

मीडिया में कथित अश्लीलता पर रोक लगाने को लेकर, दोनों पक्षों में सहमति बनी कि प्रदर्शनकारी नेता इस संबंध में पाकिस्तान इलेक्ट्रॉनिक मीडिया नियामक प्राधिकार के पास शिकायत दर्ज कराएंगे.

इस्लामाबाद के उच्च सुरक्षा क्षेत्र में चार दिन से जारी इस गतिरोध का शांतिपूर्ण तरीके से समाप्त होना सरकार के लिए बड़ी राहत की बात है. विशेष रूप से ईस्टर संडे (रविवार) को लाहौर में हुए आत्मघाती हमले में महिलाओं एवं बच्चों सहित 70 लोगों, जिनमें ज्यादातर ईसाई थे, के मारे जाने के बाद.

रविवार को 25,000 से ज्यादा की संख्या में कादरी समर्थक इस्लामाबाद के रेड जोन में घुस आए, सरकारी भवनों को क्षतिग्रस्त किया और पुलिस के साथ झड़प कीं. इस दौरान अभी तक 42 सुरक्षा कर्मी और 16 अन्य लोग घायल हुए हैं.

पाकिस्तान में ईशनिंदा संवेदनशील मामला है और यहां तक कि कथित आरोप भी भीड़ को हिंसक बना देते हैं.

इस विवादित कानून को 1980 के दशक में तत्कालीन सैन्य शासक जिआ-उल-हक लाये थे. इसके लागू होने से अभी तक सैकड़ों लोगों को इसके तहत दोषी ठहराया जा चुका है.

 

 

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