उपराष्ट्रपति ने कहा, योग विज्ञान है सिद्धांत नहीं

Jun 23, 2016
उपराष्ट्रति हामिद अंसारी ने दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय कान्फ्रेंस में कहा कि योग विज्ञान है न कि सिद्धांत।

नई दिल्ली, (पीटीआई)। उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी ने कहा कि योग विज्ञान है न कि सिद्धांत। उन्होंने यह भी कहा कि भारत सहित विकासशील देशों में स्वस्थ रहने के लिए यह पूरक हो सकता है।

‘योग फॉर बॉडी एंड बियॉन्ड (योग : शरीर और इससे परे)’ विषय पर दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय कान्फ्रेंस का अंसारी ने बुधवार को उद्घाटन किया। उद्घाटन के बाद उन्होंने कहा, ‘यह (योग) एक विज्ञान है सिद्धांत नहीं। यह दुरुस्त रहने के स्तर में और स्वस्थ्य में संपूर्ण सुधार लाता है। अधिकांश चिकित्सकों ने इसकी उपयोगिता की जांच की है।’ उपराष्ट्रपति ने अपने उद्घाटन भाषण में रेखांकित किया कि योग धर्म से ऊपर है।

अंसारी ने कहा, ‘हर धर्म और मत में ध्यान की परिपाटी है। भारतीय अनुभव का यह खास बेहतरीन अनुभव है। आस्था, ज्ञान और व्यवहार के क्षेत्र में सदियों तक इसने परिपूर्ण पारस्परिक क्रिया दी है। इसलिए हम योग और ध्यान को जैन और बौद्ध धर्म के व्यवहार में भी पाते हैं। इसी तरह ईसाई, इस्लाम और सिख धर्म में भी ध्यान को अहम स्थान दिया गया है।’

खराब स्वास्थ्य की आर्थिक लागत की गणना करते हुए अंसारी ने कहा कि भारत सहित कई विकासशील देशों में जहां सार्वजनिक स्वास्थ्य पर खर्च नहीं हो पा रहा है वहां योग पर ध्यान दिया जाना चाहिए।

आयुष मंत्री श्रीपाद येसो नाइक ने कहा, ‘योग किसी धर्म या क्षेत्र का प्रतिनिधित्व नहीं करता है। शायद यही कारण है कि 193 सदस्यीय संयुक्त राष्ट्र के 177 सदस्य देशों ने 21 जून को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के रूप में मनाने का न केवल समर्थन किया, बल्कि उसके सह-प्रायोजक भी बने।’

दो दिवसीय कान्फ्रेंस में 32 देशों के 17 अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधि हिस्सा ले रहे हैं। इस कान्फ्रेंस में योग गुरु बाबा रामदेव भी भाग ले रहे हैं। कार्यक्रम में उपराष्ट्रपति ने सर्वश्रेष्ठ योग परिधान और सर्वश्रेष्ठ योग गीत के विजेताओं को पुरस्कृत किया।

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