जानिए, ब्रेक्जिट के बाद ब्रिटेन अौर ईयू पर क्या होगा असर

Jun 24, 2016
52 फीसदी मतदान ‘ब्रेक्सिट’ के पक्ष में हुआ है, जबकि 48 प्रतिशत वोट ‘ब्रिमेन’ के लिए पड़े हैं। जानिए इसका असर ब्रिटेन अौर ईयू पर क्या पड़ेगा।

नई दिल्ली। ब्रिटेन के यूरोपीय संघ (ईयू) में बने रहने या इसकी सदस्यता से बाहर निकलने को लेकर कराए गए जनमत संग्रह में करीब 52 फीसदी मतदान ‘ब्रेक्सिट’ के पक्ष में हुआ है, जबकि 48 प्रतिशत वोट ‘ब्रिमेन’ के लिए पड़े हैं। जानिए इसका असर ब्रिटेन अौर ईयू पर क्या पड़ेगा।

1. ईयू 28 यूरोपियन देशों का एक समूह है जिसकी एक दूसरे से राजनीतिक और आर्थिक साझेदारी है। इसकी शुरूआत द्वितीय विश्व युद्ध के बाद आर्थिक सहयोग के उद्देश्य से की गई थी। ऐसा समझा जाता रहा है कि जो देश आपस में व्यवसायिक तौर पर साझेदारी रखते हैं, वह एक दूसरे के खिलाफ युद्ध से बचते हैं। इस समूह के बनने के बाद इसके सदस्य-देशों की जनता और सामान की आवाजाही बिना किसी रोकटोक के होती है। यही वजह है कि जब आप यूरोप घूमने जाते हैं तो ट्रेन पकड़कर एक देश से पड़ोसी देश जा सकते हैं। इस समूह के 19 देशों के बीच व्यापार के लिए यूरो मुद्रा चलती है। इसके अलावा पर्यावरण, परिवहन, ग्राहक अधिकारों को लेकर भी एक ही नियम लागू रहता है।

2. जहां तक व्यापार की बात है तो कुछ विशेषज्ञों का कहना है कि ईयू के साथ रहने पर ब्रिटेन को व्यवसाय में ज्यादा फायदा होता क्योंकि ऐसे में पैसे के साथ साथ लोगों और सामान को एक देश से दूसरे देश तक पहुंचाने में आसानी होती। वहीं कुछ का कहना है कि अलग होने के बाद अब ब्रिटेन उन 28 देशों का हिस्सा बनकर नहीं, अपने दम पर और अपनी शर्तों पर व्यापार कर पाएगा। वहीं पाउंड को लेकर आधिकारिक तौर पर अभी कुछ साफ नहीं हो पाया है लेकिन जनवरी में प्रधानमंत्री केमरन ने यह साफ किया था कि ब्रिटेन कभी भी यूरो को नहीं अपनाएगा।

पढ़ेंः

3. ब्रिटेन के यूरोपीय संघ से बाहर होने के फैसले के बाद दुनिया भर में बाजार में गिरावट देखने को मिल रही है। इससे अंतर्राष्ट्रीय बाजार पर असर पड़ेगा। इससे ईयू अौर ब्रिटेन दोनों को नुकसान हो सकता है।

4. ब्रिटेन के यूरोपीय संघ से अलग होने के फैसले से ब्रितानी सरकार के गिरने का खतरा उत्पन्न हो गया है। प्रधानमंत्री डेविड कैमरन ने कहा कि ‘ब्रेक्जिट’ का सम्मान किया जाएगा। साथ ही उन्होंने कहा कि अब जनता को एक नए नेतृत्व की जरूरत है और वह अक्टूबर से पहले अपने पद से इस्तीफा दे देंगे। साथ ही उन्होंने कहा कि अपने देश से प्यार करते हैं और इसकी सेवा करते हुए उन्हें गर्व महूसस हुआ।

5.यूरोपीय संघ के बिना ब्रिटेन एक कमजोर देश साबित होगा। संघ में रहते हुए यूरोपीय अस्मिता की अवधारणा भी चूर-चूर हो जाएगी। ईयू से अलग होकर ब्रिटेन अपनी संप्रभुता जरूर बहाल कर लेगा, लेकिन वह भी आर्थिक स्तर पर कमजोर हो जायेगा क्योंकि उसका आधा से अधिक निर्यात ईयू के देशों को ही होता है। ईयू से अलग होने पर न केवल ब्रिटेन की आर्थिक स्थिति बिगड़ सकती है, बल्कि एकीकृत यूनाइटेड किंगडम के तौर पर उसका अस्तित्व भी खतरे में पड़ सकता है।

6.ब्रिटेन के यूरोपीय संघ से बाहर होने के फैसले पर ऑस्ट्रेलियाई शेयर बाजार को भी बड़ा झटका लगा है और भारी रकम डूबने की आशंका जताई जा रही है।

7.ईयू से अलग होने का फैसला न केवल ईयू में बिखराव पैदा कर सकता है बल्कि खुद ब्रिटेन के भी टुकड़े हो सकते हैं। उधर ईयू के बिखरने से पश्चिमी देशों के सैन्य गुट नाटो का असर कुछ कम हो सकता है।

पढ़ेंः

लाइक करें:-
कमेंट करें :-
 

संबंधित ख़बरें

वायरल वीडियो

और पढ़ें >>

मनोरंजन

और पढ़ें >>
और पढ़ें >>