गार्जियन ड्रोनः 50 हजार फीट ऊपर से लेगा टोह, छोटी चीज भी निगाह नहीं चुरा पाएंगी

Sep 08, 2016
गार्जियन ड्रोनः 50 हजार फीट ऊपर से लेगा टोह, छोटी चीज भी निगाह नहीं चुरा पाएंगी
ड्रोन इतने अचूक हैं कि 50 हजार फीट ऊपर से भी टोह लेने में सक्षम हैं और इनकी निगाह से जमीन पर पड़ी फुटबॉल जैसी चीज की हलचल भी नहीं बच सकेगी।

वॉशिंगटन/नई दिल्ली(एजेंसी)। भारत को जल्द ही अमेरिका से 22 प्रिडेटर गार्जियन ड्रोन मिल सकते हैं। अपने आप में अनोखे ये ड्रोन विमान हिंद महासागर के ऊपर से भारतीय सीमा की निगरानी करेंगे।

ये ड्रोन इतने अचूक हैं कि 50 हजार फीट ऊपर से भी टोह लेने में सक्षम हैं और इनकी निगाह से जमीन पर पड़ी फुटबॉल जैसी चीज की हलचल भी नहीं बच सकेगी।

इन खूबियों से बढ़ेगी भारत की शक्ति
– 24 घंटे तक लगातार उड़ान भर सकता है।
– यह कैमरा और सेंसर से लैस है।
-114 हेलफायर मिसाइल ले जाने में भी सक्षम है।
– अमेरिका 1995 से इसका इस्तेमाल कर रहा है।
– अफगानिस्तान, पाकिस्तान, बोस्निया, सर्बिया, इराक, सीरिया आदि जगह इस्तेमाल कर चुका है।

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भारत को इस तरह मिलेगी मदद
– समुद्री खूफिया सूचनाएं एकत्र करने में मदद मिलेगी।
– भारत की समुद्री निगरानी व्यवस्था कई गुना मजबूत हो जाएगी।
– भारतीय वायुसेना को भी प्रिडेटर एवेंजर सिस्टम जल्द मिल सकेगा।
– इनमें इलेक्ट्रो-ऑप्टिकल इंफ्रारेड सेंसर लगे हैं, जो पानी के ऊपर से बेहतर निगरानी करने में सक्षम हैं।

विशेषता – क्रू मेंबर -0, लंबाई – 36.09 फीट, चौड़ाई – 65.62 फीट, ऊंचाई-11.81 फीट, वजन (खाली)- 2225 किग्रा, वजन (मिसाइल समेत)- 4750 किग्रा, अधिकतम गति – 480 किमी प्रति घंटा, अधिकतम रेंज – 1850 किमी।

कीमत
– करीब 30 करोड़ रुपए।

डील जल्द होने के संकेत
– अमेरिकी प्रशासन ने संकेत दिए हैं कि वह भारत को समुद्री निगरानी के लिए जल्द गार्जियन ड्रोन उपलब्ध करवा देगा।
– भारत को हिंद महासागर में निगरानी के लिए इन ड्रोन की जरूरत थी।
– इसी वर्ष जून में हुए भारत और अमेरिका के रक्षा सहयोग समझौते के चलते यह सौदा संभव होगा।
– प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अमेरिका दौरे के बाद भारत ने अमेरिकी रक्षा मंत्रालय को 22 अत्याधुनिक बहुउद्देशीय मानवरहित गार्जियन ड्रोन की खरीद के लिए अनुरोध पत्र भेजा था।
– भारत-अमेरिका के बीच रक्षा सहयोग समझौता होने के बाद यह पहला अनुरोध पत्र था।
– अमेरिका ने सौदे पर अंतिम निर्णय नहीं लिया है लेकिन स्वीकृति की प्रक्रिया शुरू होने की जानकारी मिली है।

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इसलिए महत्वपूर्ण
सूत्रों के मुताबिक, भारत की निगरानी व्यवस्था मजबूत होने को अमेरिका अपने हित में भी मान रहा है। क्योंकि इस समय भारत के आसपास के समुद्री इलाके में चीन की गतिविधियां भी बढ़ी हुई हैं, ऐसे में भारत की एकत्रित जानकारी से अमेरिका को भी लाभ मिलने की संभावना बढ़ जाएगी।

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