पठानकोट हमला: पाकिस्तान से ही रची गई थी साजिश, US ने दिए और सबूत

Aug 29, 2016
पठानकोट हमला: पाकिस्तान से ही रची गई थी साजिश, US ने दिए और सबूत
अमेरिकी जांच में यह बात सामने निकलकर आई है कि पठानकोट हमले की साजिश पाकिस्तान से ही रची गई थी।

नई दिल्ली। इसी वर्ष की शुरूआत में पठानकोट एयरबेस पर हुई आतंकी हमले की साजिश को अंजाम देने के लिए पाकिस्तान की धरती का इस्तेमाल किया गया था। अमेरिका ने इस बात की पुष्टि की है कि पठानकोट हमले की साजिश पाकिस्तान से ही रची गई थी।

एक अंग्रेजी अखबार के मुताबिक इस मामले में अमेरिका ने भारत को कुछ सबूत सौंपे हैं। अमेरिका ने यह सबूत ऐसे समय में भारत को दिए है जब राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद के मुखिया मसूद अजहर के खिलाफ पठानकोट हमले के संदर्भ में चार्जशीट दायर करने पर विचार कर रही है।

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अमेरिका ने एनआईए को जानकारी दी है कि जनवरी में एयरबेस पर हुए हमले के दौरान जैश-ए-मोहम्मद के हैंडलरों के फेसबुक का आईपी एड्रेस और जैश के वित्तीय मामलों को देख-रेख करने वाले संगठन अल रहमत ट्रस्ट की वेबसाइट का आईपी एड्रेस और लोकशन पाकिस्तान में ही है।

अमेरिका जांच में इस बात का भी खुलासा हुआ है कि जैश के हैंडलर काशिफ जान के दोस्तों तथा पठानकोट में मारे गए चारों आतंकियों (नासिर हुसैन, हाफिज अबू बकर, उमर फारूख और अब्दुल कयूम) ने जिस फेसबुक ग्रुप्स का उपयोग किया था वे जैश से जुड़े हुए थे।

हमले के समय अल रहमत ट्रस्ट के वेबपेज rangonoor.com और alqalamonline.com अपलोड किया गया था। इस दोनों का संचालन करने वाला तारिक सिद्दीकी इसके लिए एक ही ई-मेल का प्रयोग कर रहा था जिसका आईपी एड्रेस कराची के मालिर स्थित रफा-ए-आम सासायटी में था। एक अधिकारी ने बताया, "अमेरिका ने इस बात की पुष्टि की है कि ये सभी वेबसाइट्स और इनके आईपी एड्रेस की लोकेशन पाकिस्तान में पाई गयी है और पठानकोट हमले के समय इन्हें अपलोड किया गया।"

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जांच में यह बात सामने निकलकर आई है कि काशिफ जान जिस फेसबुक अकाउंट का उपयोग कर रहा था वह उसी नंबर से कनेक्टेट था जिस पर आतंकियों ने पंजाब पुलिस के एसपी सलविंदर सिंह को अगवा करने के बाद पठानकोट से फोन किया था। आतंकियों ने एक अन्य नंबर पर भी फोन किया था जिसका उपोयग "मुल्ला दादुल्ला" के फेसबुक अकाउंट से जुड़ा हुआ था। इन फेसबुक अकाउंट का संचालन पठानकोट हमले के दौरान पाकिस्तान से हो रहा था और इसके लिए पाकिस्तान की टेलीकॉम फर्म्स के आईपी एड्रेस का इस्तेमाल किया गया था।

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