‘आधार’ की तरह एनजीओ को भी लेना होगा यूनिक आइडी नंबर

Aug 03, 2016
यूनिक नंबर के बिना अब गैर सरकारी संगठनों को अनुदान नहीं मिलेगा। पारदर्शिता लाने के लिए केंद्र सरकार ने एनजीओ दर्पण की शुरुआत की है।

हरिकिशन शर्मा, नई दिल्ली। एनजीओ के नाम पर हेराफेरी अब नहीं चलेगी। सरकारी अनुदान पाने वाले एनजीओ को अब ‘आधार’ की तरह एक यूनिक नंबर लेना होगा। यह यूनिक नंबर एनजीओ के पैन नंबर से जुड़ा होगा और इसी के आधार पर गैर सरकारी संगठनों (एनजीओ) को सरकारी अनुदान मिलेगा। जिस एनजीओ के पास यह यूनिक नंबर नहीं होगा उसे सरकारी अनुदान नहीं मिलेगा। एनजीओ को यह यूनिक नंबर नीति आयोग जारी करेगा।

सूत्रों ने कहा कि नीति आयोग ने गैर सरकारी संगठनों के क्रियाकलाप में पारदर्शिता लाने के इरादे से ‘एनजीओ दर्पण पोर्टल’ शुरु किया है। सभी गैर सरकारी संगठनों को इस पोर्टल पर पंजीकरण कराना जरूरी है। पंजीकरण कराने पर एनजीओ को एक यूनिक नंबर मिलेगा जो उनके पैन नंबर से लिंक होगा है। गैर सरकारी संगठन जब सरकार के पास अनुदान की अर्जी देंगे तो उन्हें इस यूनिक कोड की जरूरत पड़ेगी। एनजीओ एक कॉमन पोर्टल के माध्यम से ही सरकारी ग्रांट के लिए आवेदन कर सकेंगे।

सूत्रों ने कहा कि 27 जुलाई को दिल्ली में राज्यों के मुख्य सचिवों की बैठक में नीति आयोग ने सभी प्रदेश सरकारों को एनजीओ दर्पण पोर्टल पर गैर सरकारी संगठनों को पंजीकरण कराने के लिए प्रोत्साहित करने का आग्रह किया। आयोग का कहना है कि ऐसा होने पर पारदर्शिता बढ़ेगी। फिलहाल 71,000 से अधिक एनजीओ इस पर पंजीकृत हो चुके हैं।

एनजीओ दर्पण के माध्यम से राज्य सरकारों के विभिन्न विभाग यह भी देख सकेंगे कि उन्होंने किसी सामाजिक विकास कार्य के लिए जो धनराशि किसी एनजीओ को दी है वह ठीक से खर्च हुई है या नहीं। इसलिए इससे राज्यों को मदद मिलेगी। साथ ही किसी राज्य में काम करने वाले संगठनों के बारे में उस राज्य से बाहर सूचना भी उपलब्ध हो सकेगी।

उल्लेखनीय है कि देशभर में लगभग 31 हजार एनजीओ पंजीकृत हैं। इस तरह तकरीबन 600 लोगों पर एक एनजीओ है। इसमें से 40 हजार से अधिक गैर सरकारी संगठन ऐसे हैं जो विदेशी सहायता प्राप्त करने को एफसीआरए के लिए पंजीकृत हैं। बहुत से संगठन सिर्फ कागज पर चल रहे हैं। ऐसे में किसी एनजीओ ने सरकारी अनुदान का इस्तेमाल किस तरह किया इसका पता करना काफी मुश्किल होता है।-

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