रघुराम राजन के बाद गवर्नर को नहीं मिलेगा वीटो पावर!

Jun 20, 2016
रघुराम राजन के बाद आने वाले गवर्नर के पास वीटो पावर नहीं होगी। इस तरह से नए गवर्नर शायद ब्याज दरों को लेकर वित्त मंत्रालय के साथ अब वैसे विवाद में नहीं उलझेंगे

नई दिल्ली, (जयप्रकाश रंजन)। आरबीआइ गवर्नर रघुराम राजन का कार्यकाल संभालने वाले नए गवर्नर के लिए बहुत कुछ नया होगा। पहली बार देश में आरबीआइ का कोई ऐसा गवर्नर होगा जिसके पास ब्याज दरों को लेकर वीटो अधिकार नहीं होगा। यानी अभी जिस तरह से मौद्रिक नीति तय आरबीआइ गवर्नर के इशारों पर होती रही है वैसा अब नहीं होगा। इसमें केंद्र की भूमिका ज्यादा अहम होगी। इस तरह से नए गवर्नर शायद ब्याज दरों को लेकर वित्त मंत्रालय के साथ अब वैसे विवाद में नहीं उलझेंगे जैसा कि राजन या पूर्व गवर्नर डी सुब्बाराव उलझ चुके हैं।

वित्त मंत्रालय के सूत्रों के मुताबिक यह पक्का है कि नए आरबीआइ गवर्नर को अब ब्याज दरों को लेकर बहुत ज्यादा माथा पच्ची नहीं करनी होगी। क्योंकि आरबीआइ के लिए सालाना महंगाई का लक्ष्य तय करने और बैंकों के लिए बेंचमार्क ब्याज दर तय करने का काम अब मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) करेगी। इसमें तीन प्रतिनिधि सरकार की तरफ से मनोनीत होंगे।

आरबीआइ गवर्नर भी इसमें एक सामान्य सदस्य होंगे। इनके अलावा भी समिति में आरबीआइ के दो सदस्य होंगे। एमपीसी के गठन के साथ ही ब्याज दरों को तय करने का मौजूदा तरीका पूरी तरह से बदल जाएगा। अभी आरबीआइ की तरफ से गठित एक पैनल अर्थव्यवस्था की स्थिति को देखते हुए बेंचमार्क ब्याज दर तय करने की सिफारिश करता है। लेकिन आरबीआइ गवर्नर के पास यह सर्वाधिकार सुरक्षित है कि वह इसे स्वीकार करता है या खारिज करता है।

माना जाता है कि नई समिति के काम शुरु करने के बाद ब्याज दरों को लेकर केंद्र की भूमिका बढ़ जाएगी। बताते चलें इस वजह से वित्त मंत्रालय और आरबीआइ गवर्नर के बीच कई बार तनाव पैदा हो जाता है। डॉ. रघुराम राजन के खिलाफ मोर्चा खोले भाजपा सांसद सुब्रमणियन स्वामी यह मुद्दा भी उठाते रहे हैं। वाणिज्य व उद्योग मंत्री निर्मला सीतारमन ने भी उच्च ब्याज दरों को लेकर आरबीआइ गवर्नर राजन पर तंज कसा था। इसके पहले पूर्व गवर्नर डी. सुब्बाराव ने जब ब्याज दरों को कम करने से मना किया था तब तत्कालीन वित्त मंत्री पी चिदंबरम के साथ उनकी तल्खी काफी बढ़ गई थी। चिदंबरम ने यहां तक कहा था कि अगर देश के आर्थिक विकास की जिम्मेदारी सिर्फ सरकार की है तो फिर यही सही। अब ऐसी स्थिति नहीं होगी।

सरकार पहले ही यह घोषणा कर चुकी है कि सितंबर, 2016 या तीसरी तिमाही से मौद्रिक नीति समिति काम करने लगेगी। राजन का कार्यकाल भी सितंबर के पहले हफ्ते में समाप्त हो रहा है। सूत्रों के मुताबिक नए गवर्नर की खोज का काम अगले हफ्ते से ही तेज हो जाएगा और सरकार जुलाई के अंतिम हफ्ते या अगस्त के पहले हफ्ते में नए गवर्नर का फैसला कर लेगी।

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