सबसे बड़ी स्पेक्ट्रम नीलामी को मिली मंजूरी

Jun 22, 2016
कैबिनेट ने देश में अभी तक की सबसे बड़ी स्पेक्ट्रम नीलामी के प्रस्ताव को मंजूरी दी दी है। इस बार सरकार के पास उपलब्ध जितने स्पेक्ट्रम है उसमें से अधिकांश की नीलामी हो जाएगी।

जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। एक जमाना था जब सरकार कब स्पेक्ट्रम आवंटित करती थी और कितना करती थी इसका पता किसी को नहीं चलता था। लेकिन अब हालात बदल चुके हैं। इस संदर्भ में आज कैबिनेट ने देश में अभी तक की सबसे बड़ी स्पेक्ट्रम नीलामी के प्रस्ताव को मंजूरी दी दी है। इस बार सरकार के पास उपलब्ध जितने स्पेक्ट्रम है उसमें से अधिकांश की नीलामी हो जाएगी। इससे सरकार को अगले पांच वर्षो में 5.66 लाख करोड़ रुपये का राजस्व हासिल होगा। चालू वित्त वर्ष दौरान ही सरकार को इससे तकरीबन 1.50 लाख करोड़ रुपये हासिल होने की उम्मीद है। माना जाता है कि इस नीलामी के बाद हर दूरसंचार कंपनी के पास वायस व डाटा सेवा देने के लिए पर्याप्त स्पेक्ट्रम उपलब्ध हो जाएगा और काल ड्राप की समस्या भी खत्म होगी।

वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कैबिनेट के इस फैसले के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि यह अभी तक की सबसे बड़ी स्पेक्ट्रम नीलामी होगी। वैसे इस नीलामी से जुड़े एक अहम मसले स्पेक्ट्रम यूजेज चार्जेज (एसयूसी) की दर के मामले को एक बार फिर दूरसंचार नियामक एजेंसी ट्राई को भेज दिया गया है। ट्राई ने पहले इसके 3 फीसद रखने की सिफारिश की थी लेकिन इस पर दूरसंचार आयोग को आपत्ति थी। यह दूरसंचार कंपनियों की तरफ से अभी दिए जा रहे शुल्क से कम है। अभी कंपनियां तीन फीसद से आठ फीसद की दर से एसयूसी देती हैं। हालांकि यह शुल्क कम किया जाए तो इससे कॉल दरों में भी कमी आने का रास्ता साफ होगा। लेकिन जेटली का कहना है कि इस पर जल्द ही ट्राई की राय ले कर अंतिम फैसला कर लिया जाएगा।

बहरहाल, यह पहला मौका होगा जब सरकार 700 मेगाह‌र्ट्ज से लेकर 2500 मेगाहटर््ज (700, 800, 1800, 2100, 2300 और 2500 मेगाह‌र्ट्ज) के स्पेक्ट्रम की बिक्री होगी। इसमें सबसे ज्यादा 700 एमएच स्पेक्ट्रम के लिए कंपनियों में उत्साह है क्योंकि इससे नई तकनीकी आधारित मोबाइल सेवाओं (4जी ) के लिए ज्यादा उपयुक्त माना जा रहा है।

दूरसंचार आयोग ने कहा है कि इस पर अन्य स्पेक्ट्रम की तुलना में 70 फीसद कम लागत पर दूरसंचार सेवा दी जा सकती है। यही वजह है कि दूरसंचार आयोग ने पूरे देश में 700 मेगाह‌र्ट्ज स्पेक्ट्रम के लिए न्यूनतम आधार मूल्य 11,445 करोड़ रुपये तय करने की सिफारिश की है। सबसे ज्यादा इश स्पेक्ट्रम के लिए ही मारामारी होगी। वैसे इसके बाद 800 एमएच के लिए भी कंपनियों में काफी बोली लगाई जा सकती है। इसके लिए राष्ट्रीय आधार मूल्य 5,819 करोड़ रुपये तय कर दिया गया है।

2300 और 2500 एमएच के लिए 817 करोड़ रुपये का आधार मूल्य तय है। इस आधार पर सरकार ने पहले ही अनुमान लगाया था कि उसे 5.66 करोड़ रुपये का राजस्व हासिल होगा। पहले साल में तकरीबन डेढ़ लाख करोड़ रुपये का राजस्व मिलेगा। सनद रहे कि पिछले वित्त वर्ष के दौरान भी 1.1 लाख करोड़ रुपये की स्पेक्ट्रम की बिक्री की गई थी।

पढ़ें-

लाइक करें:-
कमेंट करें :-
 

संबंधित ख़बरें

वायरल वीडियो

और पढ़ें >>

मनोरंजन

और पढ़ें >>
और पढ़ें >>