सवाल दस हजार का नहीं, लाखों भारतीयों की है चिंता : सुषमा स्वराज

Aug 01, 2016
विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने कहा कि सऊदी अरब में जिस तरह के हालात पैदा हुए हैं वो चिंताजनक हैं। भारत सरकार मुश्किल में फंसे लोगों की हरसंभव मदद करने की कोशिश कर रही है।

नई दिल्ली[जयप्रकाश रंजन] । विदेश मंत्री सुषमा स्वराज और भारतीय विदेश मंत्रालय की तत्परता ने सऊदी अरब की एक कंपनी बंद होने से उसमें कार्यरत दस हजार भारतीयों को भुखमरी से तो बचा लिया लेकिन सरकार की असली चिंता खाड़ी देश में कार्यरत तीस लाख भारतीयों की है।

सऊदी ओजर नाम की बड़ी कंपनी जिस तरह से बंद हुई है उससे सऊदी अरब की अर्थव्यवस्था के बारे में लगाए जा रहे कयास सही साबित होने के संकेत मिलते हैं। खास तौर पर कंस्ट्रक्शन (निर्माण) से जुड़ी कई ऐसी कंपनियां हैं जिनकी हालत काफी खराब है और उनके बंद होने की आशंका है। इनमें कार्यरत भारतीय श्रमिकों को महीनों बाद वेतन मिल रहा है। मुसीबत में सऊदी कंस्ट्रक्शन उद्योग के श्रमिकसऊदी में काम करने वाले 30 लाख भारतीयों में तकरीबन 70 फीसद कंस्ट्रक्शन उद्योग से जुड़े हैं। यह उद्योग काफी खराब दौर से गुजर रहा है।

कई अंतरराष्ट्रीय संस्थानों की रिपोर्ट पर भरोसा करें तो कच्चे तेल की कीमतों में ऐतिहासिक गिरावट से सऊदी अरब की अर्थव्यवस्था की कमर टूट गई है। इसका सबसे बुरा असर कंस्ट्रक्शन उद्योग पर पड़ा है जो हाल के कुछ वर्षो में वहां की अर्थव्यवस्था को आगे बढ़ा रहा था। सऊदी की एकमात्र सरकारी कंस्ट्रक्शन कंपनी अल खोदारी एंड संस के प्रमुख फव्वाज अल खोदारी ने कहा, कंस्ट्रक्शन उद्योग में 80 फीसद गिरावट आ चुकी है। पिछले एक वर्ष से सरकार की तरफ से दिए जाने वाले ठेकों में काफी गिरावट आई है। दूसरी कंपनियों में भी दिक्कतजेद्दा स्थित भारतीय दूतावास ने तीन दिनों में ‘सऊदी ओजर’ के 2450 कर्मचारियों को खाना पहुंचाया है। लेकिन, इस तरह की कुछ और कंपनियां हैं जहां हजारों भारतीय कार्यरत हैं और उन्हें समय पर वेतन नहीं मिल रहा। विदेश मंत्री स्वराज ने इन लोगों की संख्या दस हजार के करीब बताई है।

जेद्दा के काउंसल जनरल मोहम्मद नूर रहमान शेख ने ‘दैनिक जागरण’ से फोन पर कहा, ‘कुछ और कंपनियां हैं जिनमें काम करने वाले हिंदुस्तानियों को वेतन नहीं मिल रहा। मसलन, एक बड़ा उद्योग समूह बिन लादेन है जिसके कंस्ट्रक्शन विभाग में काम करने वाले भारतीयों को काफी अंतराल पर वेतन मिल रहा है। लेकिन इस कंपनी की मेस (रसोई) चल रही है।’ वह मानते हैं कि आर्थिक मंदी की वजह से यह स्थिति आई है। खाना मिला, स्वदेश वापसी में दिक्कतेंशेख बताते हैं कि सऊदी ओजर में कार्यरत श्रमिकों को लंबे समय से वेतन में दिक्कतें आ रही थीं। लेकिन कंपनी की मेस से श्रमिकों को खाना मिल रहा था। कुछ दिन पहले अचानक मेस बंद हो गई और चूंकि इन श्रमिकों के पास पैसा भी नहीं था इसलिए उनके सामने भुखमरी की नौबत आ गई।

विदेश मंत्रालय की तत्परता और जेद्दा स्थित भारतीय दूतावास ने दिन-रात एक कर सभी भारतीय श्रमिकों को खाना दे दिया है। यह खाना सात से दस दिनों तक चलेगा। लेकिन, उन्हें स्वदेश लाने में दिक्कत आ रही है क्योंकि सऊदी कानून के मुताबिक जब तक नियोक्ता कंपनी की तरफ से मंजूरी नहीं मिलेगी श्रमिक स्वदेश नहीं लौट सकता। सऊदी ओजर के अधिकारियों का अभी कोई पता नहीं चल रहा। भारतीय दूतावास के अधिकारियों ने बीच का रास्ता निकालने के लिए स्थानीय श्रम विभाग से बातचीत शुरू की है।

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