493 पेड़ काटने की मांग पर सुप्रीमकोर्ट ने सीईसी से मांगी रिपोर्ट

Jun 03, 2016
रेल मंत्रालय के तहत आने वाले डेडिकेटेड फ्रेट कारीडोर कारपोरेशन ने सुप्रीमकोर्ट में अर्जी दाखिल कर बिजली की लाइन बिछाने के लिए ताज संरक्षित क्षेत्र में 493 पेड़ काटने की इजाजत मांगी

जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। ताज संरक्षित क्षेत्र मे 493 पेड़ काटने की इजाजत मांगने वाली अर्जी पर सुप्रीमकोर्ट ने केंद्रीय अधिकारिता समिति (सीईसी) से रिपोर्ट मांगी है। रेल मंत्रालय के तहत आने वाले डेडिकेटेड फ्रेट कारीडोर कारपोरेशन ने सुप्रीमकोर्ट में अर्जी दाखिल कर बिजली की लाइन बिछाने के लिए ताज संरक्षित क्षेत्र में 493 पेड़ काटने की इजाजत मांगी है।

ये मामला ईस्टर्न डेडिकेटेड फ्रेट कारीडोर के लिए बिजली की लाइन बिछाने का है। ये कारीडोर पश्चिम बंगाल में धनकुनी से शुरू होकर पंजाब में लुधियाना तक जाता है। इसका कुछ हिस्सा ताज संरक्षित क्षेत्र से होकर गुजरता है। जहां बिजली की लाइन बिछाने के लिए पेड़ काटने से पहले सुप्रीमकोर्ट की इजाजत लेना जरूरी है। कारपोरेशन ने मामले पर तत्काल सुनवाई की जरूरत बताते हुए कोर्ट से गर्मी की छुट्टियों में ही अर्जी पर सुनवाई का अनुरोध किया था।

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शुक्रवार को जब मामला सुनवाई पर आया तो न्यायमूर्ति पीसी घोष व न्यायमूर्ति अमिताव राय की अवकाशकालीन पीठ ने कारपोरेशन के वकील से पूछा कि क्या इस पर सीईसी ने अपनी सहमति दी है। वकील ने कहा कि अभी नहीं सामान्यता कोर्ट ही सीईसी से रिपोर्ट मांगता है। इस पर पीठ ने कारपोरेशन को अर्जी की प्रति सीईसी को देने का निर्देश देते हुए सीईसी से मामले की जांच कर चार सप्ताह में रिपोर्ट देने को कहा है।

बात ये है कि फरीदाबाद और आगरा के बीच होकर गुजर रहे डेडिकेटेड फ्रेड कारीडोर को बिजली आपूर्ति के लिए 132 केवी की बिजली लाइन बिछानी है। बिजली की लाइन बिछाने के लिए ताज संरक्षित क्षेत्र में पड़ रहे 493 पेड़ काटने पड़ेंगे। कारपोरेशन की अर्जी में कहा गया है कि 132 केवी की बिजली की ये लाइन ईस्टर्न डेडिकेटेड फ्रेट कारीडोर का हिस्सा है।

कारीडोर पश्चिम बंगाल में धनकुनी से शुरू होकर पंजाब में लुधियाना तक जाता है। ये कारीडोर झारखंड, बिहार, उत्तर प्रदेश और हरियाणा से होकर गुजरता है। इसका फिरोजाबाद और आगरा जिले में पड़ने वाला कुछ हिस्सा ताज संरक्षित क्षेत्र से होकर गुजरता है। डेडिकेटेड फ्रेड कारीडोर विश्व बैंक पोषित योजना है। ये राष्ट्रीय महत्व की परियोजना है और देश की आर्थिक तरक्की के लिहाज से भी महत्वपूर्ण है।

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