सुब्रमण्यम स्वामी ने पार्टी के प्रति वफादारी का हवाला दे जीएसटी पर साधी चुप्पी

Aug 04, 2016
राज्यसभा में जीएसटी संविधान संशोधन बिल पास होने के एक दिन बार सुब्रमण्यम स्वामी ने कहा कि वह इस बिल पर कुछ भी नहीं बोलेंगे।

नई दिल्ली, प्रेट्र। वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) संविधान संशोधन बिल को राज्यसभा में मंजूरी मिलने के एक दिन बाद गुरूवार को भारतीय जनता पार्टी के राज्यसभा सांसद सुब्रमण्यम स्वामी ने कहा वह बिल के बारे में कुछ भी नहीं बोलेंगे। इसका कारण उन्होंने ये बाताया कि उनके अर्थशास्त्र के प्रति अध्ययनशील प्रतिबद्धता और पार्टी के वफादारी के बीच विरोधाभास है।

स्वामी ने गुरूवार को एक ट्वीट कर कहा- क्या पीटी ने इस प्रस्तावित जीएसटी संविधान संशोधन के बारे में अध्ययन किया है कि आखिर क्या इसका मकसद है और जीएसटीन की क्या भूमिका है? यहां पर स्वामी पेट्रोटिक ट्वीपल जिसका शॉर्ट फॉर्म है टीपी यानि ट्विटर पर सक्रिय देशभक्त लोगों के लिए वे इसका इस्तेमाल करते हैं। साथ ही. जीएसटीएन का मतलब वस्तु एवं सेवा कर नेटवर्क से है।

ट्विटर पर जब स्वामी के एक फॉलोअर ने उनसे यह पूछा कि क्यों नहीं वे जीएसटी के बारे में अपने विचार रखते हैं और ये बताते हैं कि जीएसटी का अर्थव्यवस्था पर क्या असर होगा। इसके जवाब में स्वामी ने ट्वीट कर रहा, मैं इसलिए चुप हूं क्योंकि मेरे अर्थशास्त्र के प्रति अध्ययनशील प्रतिबद्धता और जिस पार्टी के लिए मैं वफादार हूं उसकी तरफ से लिए गए फैसले में विरोधाभास है।

उन्होंने एक और ट्वीट करते हुए लिखा कि अर्थशास्त्री जीडीपी दरें बढ़ाने के लिए अब तक सिर्फ यही मानते थे कि ज्यादा निवेश और पूंजी के साथ श्रम उत्पादकता बढ़े। गौरतलब है कि वित्तमंत्री अरूण जेटली ने कहा कि वह ऐसा मानते हैं कि देशभर में लग रहे अलग-अलग कर की दरों पर अगर जीएसटी लागू कर दिया जाता है तो जीडीपी को करीब दो फीसदी और बढ़ाने में मदद मिलेगी।

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