प्रसव के बाद छह महीने की छुट्टी का बिल राज्य सभा से पास

Aug 11, 2016
जल्दी ही काम-काजी महिला को प्रसव के बाद छह महीने की वेतन सहित छुट्टी मिल सकेगी। यह प्रावधान केंद्र सरकार के कार्यालयों पर ही नहीं दस से अधिक कर्मचारी वाले निजी संस्थानों पर भी लागू

जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। जल्दी ही काम-काजी महिला को प्रसव के बाद छह महीने की वेतन सहित छुट्टी मिल सकेगी। यह प्रावधान केंद्र सरकार के कार्यालयों पर ही नहीं दस से अधिक कर्मचारी वाले निजी संस्थानों पर भी लागू होगा। काम-काजी महिलाओं के लिए बेहतर माहौल मुहैया करवाने के लिए ऐसे कई जरूरी प्रावधानों वाला मातृत्व सुविधा संशोधन विधेयक गुरुवार को राज्य सभा में पारित हो गया।

केंद्रीय श्रम मंत्री बंडारू दत्तात्रेय ने इस बिल पर चर्चा के दौरान कहा कि इसे लागू करने के बाद काम-काजी महिलाओं को 26 हफ्तों की छुट्टी मिल सकेगी। अभी सिर्फ 12 सप्ताह की छुट्टी का प्रावधान है। यह संशोधन लागू होने के बाद छुट्टी की अवधि के लिहाज से भारत दुनिया में तीसरे पायदान पर पहुंच जाएगा।

अधिकांश विकसित देशों में भी इतनी अवधि की छुट्टी का प्रावधान नहीं है। साथ ही इन प्रावधानों से कार्यस्थलों पर महिलाओं की संख्या में भी बढ़ोतरी हो सकेगी। नए प्रावधानों का देश की 18 लाख काम-काजी महिलाओं को फायदा मिल सकेगा। राज्य सभा में यह संशोधन विधेयक सर्व सम्मति से पारित हो गया। चर्चा के दौरान महिला और बाल विकास मंत्री मेनका गांधी ने कहा कि लगातार परिवार छोटे हो रहे हैं। इससे जरूरी हो जाता है कि जन्म लेने वाले बच्चे को मां का पूरा समय मिल सके।

इसी तरह बच्चों में कुपोषण के मामलों को कम करने और बच्चे के साथ मां की प्रगाढ़ता कायम करने के लिए यह समय बहुत उपयोगी होगा। बिल में बच्चों को गोद लेने वाली या सरोगेट माता की मदद से हासिल करने वाली मां को भी मातृत्व सुविधा का फायदा दिए जाने का प्रावधान किया गया है।

हालांकि विपक्ष के सदस्यों ने इसमें उन महिला को भी शामिल करने की मांग की है जो सरोगेट मां के तौर पर बच्चे को अपने गर्भ में पालती है और जन्म देती है। बसपा नेता सतीष चंद्र मिश्र, सपा सांसद जया बच्चन, तृणमूल के डेरिक ओ ब्रायन सहित कई सांसदों की इस मांग पर श्रम मंत्री ने विचार करने का भरोसा दिलाया है।

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