‘कबाड़खाने में पड़े लोगों की मैनेज करने के लिए किया जाता है राज्यपाल के पद का उपयोग’

Aug 19, 2016
अक्सर केंद्र सरकार को निशाने पर लेनी वाली उसकी सहयोगी शिवसेना ने एकबार फिर राज्यपालों की नियुक्ति के संदर्भ में केंद्र सरकार पर निशाना साधा है।

नई दिल्ली (जेएनएन)। महाराष्ट्र और केंद्र सरकार में सत्तासीन भाजपा की सहयोगी शिवसेना ने एक बार फिर केंद्र सरकार पर निशाना साधा है। अपने मुखपत्र सामना के जरिये शिवसेना ने राज्यपालों की नियुक्ति पर सवाल खड़े करते हुए लिखा है कि राज्यपाल नियुक्ति के बारे में जो कुछ कांग्रेसी शासन में घट रहा था वहीं सब मोदी शासन में भी घटित हो रहा है।

"राजभवन का ‘ब्रांड’ बदला" नामक शीर्षक से लिखे गए संपादकीय में शिवसेना ने लिखा है कि राज्यपाल का पद अपने- अपने राजनीतिक विचारों के कबाड़खाने में पड़े लोगों की व्यवस्था के लिए उपयोग में किया जाता है।

इस लेख में आगे लिखा गया है, "मणिपुर तथा पंजाब में जल्द चुनाव होने वाले हैं। इसलिए नए राज्यपालों को उनका राजनीतिक कर्तव्य निभाने का मौका मिल सकता है। क्योंकि राज्यपालों की नियुक्ति राजनीतिक स्वरूप की ही होती है इसलिए इसमें छिपाने जैस कुछ नहीं है। अस्थिरता के कार्यकाल में राजभवन में चली जाती है और राज्य के संवैधानिक प्रमुख आंख खोलकर अपने राजनीतिक मालिक के आदेश का पालन करते हैं, इसमें कुछ नया नहीं है इसलिए राज्यपाल का पद चाहिए ही क्यों?"

राज्यपालों की नई सूची के संदर्भ में भी इस में कुछ इस प्रकार लिखा गया है, ‘ यह सच है कि राज्यापल, नायब राज्यपाल पद के कारण सत्ताधारी पार्टी करीब 40 लोगों के लिए गाड़ी-घोड़ा, बंगला और अन्य सुविधाओं की व्यवस्था हो जाती है। अब तक इन पदों पर नियुक्त किए गए सारे लोग भाजपा के कार्यकर्ता और नेता हैं। राजनीतिक कार्यकर्ताओं की नियुक्ति करनी होगी तो एनडीए के तेलुगुदेशम, अकाली दल, शिवसेना में बी कई पूर्व सांसद, पूर्व विधायक और पूर्व मंत्री कर्तव्य निभाने को तैयार हैं।’

इस लेख के अन्त में लिखा कि ‘सरकार 280 वाले चला रहे हैं तब तक मित्रों की बात कोईसुनेगा, ऐसा लगता नहीं हैं। नए राज्यपालों को हमारी शुभकामनाएं!’

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